नयी दिल्ली, 31 जनवरी (भाषा) भारतीय दिवाला और शोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) के चेयरपर्सन रवि मित्तल ने शनिवार को कहा कि नियमों की प्रभावशीलता को बनाए रखते हुए अनुपालन आवश्यकताओं को कम करने के प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने मजबूत कॉरपोरेट शासन के महत्व पर भी बल दिया।
भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान (आईसीएआई) द्वारा ग्रेटर नोएडा में आयोजित ‘वर्ल्ड फोरम ऑफ अकाउंटेंट्स’ के एक सत्र में मित्तल के साथ सेबी के प्रमुख तुहिन कांत पांडेय और एनएफआरए के चेयरपर्सन नितिन गुप्ता ने भी अपने विचार साझा किए।
मित्तल ने कहा कि कानूनों के बेहतर कार्यान्वयन और कम अनुपालन की आवश्यकता है। उन्होंने जानकारी दी कि आईबीबीआई ने आईआईएम अहमदाबाद से अपने नियमों की समीक्षा करने और अनुपालन आवश्यकताओं को सरल बनाने के लिए कहा है।
पांडेय ने सनदी लेखाकारों के साथ गहरे सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने कहा, ”नियम केवल ढांचा तैयार कर सकते हैं और न्यूनतम मानक लागू कर सकते हैं, लेकिन नियम अकेले नैतिक संस्कृति पैदा नहीं कर सकते।”
गुप्ता ने कंपनियों की व्यवहार्यता के आकलन पर बात की। उन्होंने सुझाव दिया कि किसी इकाई के निरंतर संचालन के आकलन के लिए वर्तमान 12 महीने की समय सीमा के बजाय लंबी अवधि पर विचार किया जाना चाहिए।
भाषा पाण्डेय
पाण्डेय