मुंबईः Sunetra Pawar Deputy CM: दिवंगत नेता अजित पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार शनिवार को महाराष्ट्र की पहली महिला डिप्टी सीएम बन गईं। राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने लोकभवन में सुनेत्रा को शपथ दिलाई। अजित के निधन के चौथे दिन ही यह शपथ ग्रहण आयोजित किया गया। इसे पूरे राजनीतिक घटनाक्रम के बाद राजनीतिक गलियारों, बुद्धजीवियों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर एक सवाल घूम रहा है कि क्या कुर्सी एक इंसान से ज्यादा महत्वपूर्ण है? एक ओर जहां राजनेताओं का तर्क है तो दूसरी ओर मानवीय संवेदना।
Sunetra Pawar Deputy CM: हिंदू धर्म के नियमों के अनुसार किसी के निधन पर परिवार 13 दिनों तक शोक संवेदित रहता है। मृतक के परिवार और मित्र एकत्रित होते हैं और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हैं, लेकिन महाराष्ट्र में प्लेन हादसे में जान गंवाने वाले डिप्टी सीएम अजित पवार की पत्नी को इस अवधि से पहले ही डिप्टी सीएम बना दिया जाता है। शोक कितनी देर टिकता है, संवेदना कब तक रहती है और सत्ता की कुर्सी कितनी जल्दी खालीपन भर देती है यही असली सच उजागर करता है।
अजित पवार की मौत और सुनेत्रा का शपथ ग्रहण.. ये जल्दबाजी महज एक संयोग नहीं, बल्कि सोची-समझी राजनीतिक स्टंट लगता है। अजित पवार की तीन दिन पहले 28 जनवरी को बारामती में निधन के बाद 29 जनवरी को अंतिम संस्कार किया गया। शोक की छाया में, अंतिम संस्कार की राख अभी ठंडी भी नहीं हुई कि सियासत-दाओं ने पत्नी को डिप्टी सीएम बनाने की कवायद शुरू कर दी। दावा है कि अजित गुट के बड़े नेता- प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, छगन भुजबल रात-दिन मीटिंग कर रहे थे। अजीत पवार के निधन पर जो नेता घड़ियाली आंसू बहा रहे थे, वहीं नेता अब सुनेत्रा पवार को डिप्टी सीएम बनाने पर ताली बजा रहे हैं। नेताओं के इस व्यवहार पर कई लोग ये भी कह रहे हैं कि शोक के समय नेताओं के आंसू केवल दिखाने के लिए होते हैं। सवाल यह अस्थि विसर्जन के तुरंत बाद ऑनलाइन-ऑफलाइन चर्चाएं, सुनेत्रा को उपमुख्यमंत्री बनाने का फैसला- सब कुछ इतनी तेजी से क्यों?
Sunetra Pawar Deputy CM थोड़ा मौन, थोड़ी संवेदना और थोड़ा समय, ताकि समाज उस खालीपन को समझ सकें, जो वह व्यक्ति छोड़कर गया है, लेकिन राजनीति अक्सर ठहरना नहीं जानती। शोक की चादर अभी ठीक से बिछी भी नहीं और सत्ता की कुर्सी पर नया नाम टांग दिया गया। यह दृश्य अपने आप में बहुत कुछ कह देता है, बिना कुछ बोले। जब सत्ता इतनी जल्दी उत्तराधिकारी खोज लेता है, तो यह संदेश जाता है कि व्यक्ति वैकल्पिक है, कुर्सी नहीं।
इस राजनीतिक घटनाक्रम के बाद सियासी हलचले भी तेज है। महाराष्ट्र के मंत्री और शिवसेना नेता संजय शिरसाट ने अपने बयान में कहा कि 28 जनवरी को अजित पवार की विमान दुर्घटना में मौत के कुछ ही दिनों बाद नए उपमुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह को ‘बाद में होना चाहिए था’। उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि इस घटनाक्रम से पता चलता है कि कुर्सी इंसान से ज्यादा जरूरी है। इसी के साथ मंत्री संजय शिरसाट ने हा कि ऐसा लगता है कि यह जल्दबाजी एनसीपी की कुछ अंदरूनी राजनीति का नतीजा है।
शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता आनंद दुबे ने इस मामले को लेकर कहा कि अजित पवार की चिता अभी ठंडी भी नहीं हुई है और शपथ ग्रहण की तैयारी चल रही है। ‘महाराष्ट्र ने एक बहुत बड़ा नेता खोया है। बारामती ने अपना लाल खोया है। इसके बावजूद हम लोग देख रहे हैं कि सुनेत्रा पवार उपमुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाली हैं। यह उनकी पार्टी का अंदरूनी मामला है। लेकिन, ये जो हो रहा है… क्या नैतिकता है? क्या यह किसी भी राजनीतिक दल को शोभा देता है।
शिवसेना (UBT) के नेता कहा, ‘क्या भाजपा को इस बात का डर है कि अगर जल्दबाजी नहीं करेंगे तो कहीं एनसीपी के दोनों गुट एक न हो जाएं और फिर महाविकास अघाड़ी के साथ न चली जाएं। यह भी हो सकता है कि एनसीपी मौजूदा सरकार से समर्थन वापस ले ले। कुछ भी हो सकता है।’ उन्होंने कहा कि जो हो रहा है, वो अच्छा नहीं हो रहा। ऐसा पहले कभी नहीं हुआ है। आनंद दुबे ने कहा, ‘बड़े नेता की मृत्यु होती है तो लोग शोकाकुल रहते हैं। यहां तो लग रहा है कि जिस दिन चिता जली, उसी दिन से बैठकों का दौर शुरू हो गया। यह गंदी राजनीति है।’