नयी दिल्ली, 26 जून (भाषा) केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने शुक्रवार को कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) का जिम्मेदारी के साथ उपयोग को सुनिश्चित करने और एल्गोरिदम में संभावित पूर्वाग्रहों को रोकने के लिए भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान (आईसीएआई) को एआई के लिए आश्वासन मानक विकसित करने पर विचार करना चाहिए।
राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित आईसीएआई के ‘एआई इनोवेशन समिट’ को संबोधित करते हुए शेखावत ने कहा कि चार्टर्ड अकाउंटेंट और अन्य पेशेवरों को निरंतर कौशल उन्नयन तथा प्रौद्योगिकी में हो रहे बदलावों के साथ तालमेल बनाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) भारत के लिए नवाचार, ईमानदारी और विश्वास के साथ वैश्विक नेतृत्व स्थापित करने का अवसर प्रदान करती है।
पांच लाख से अधिक सदस्यों वाले आईसीएआई द्वारा अपने सदस्यों के कौशल उन्नयन के लिए एआई से संबंधित विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि संस्थान एआई के लिए मानक विकसित करने पर विचार कर सकता है। इसके साथ ही उन्होंने एल्गोरिदम से जुड़े पूर्वाग्रहों के कारण पैदा होने वाली चुनौतियों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि चार्टर्ड अकाउंटेंट केवल वित्तीय पेशेवर ही नहीं, बल्कि निवेशकों के भरोसे के संरक्षक भी हैं।
शेखावत ने जिम्मेदार आचरण और विश्वास के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि भारत कृत्रिम मेधा का जिम्मेदारी के साथ उपयोग की वकालत कर रहा है।
भाषा योगेश रमण
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