आईसीएआर ने अरहर का पहला टी2टी जीनोम विकसित किया

आईसीएआर ने अरहर का पहला टी2टी जीनोम विकसित किया

आईसीएआर ने अरहर का पहला टी2टी जीनोम विकसित किया
Modified Date: August 4, 2026 / 09:37 pm IST
Published Date: August 4, 2026 9:37 pm IST

नयी दिल्ली, चार अगस्त (भाषा) भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने अरहर की ‘आशा’ किस्म का देश का पहला ‘टेलोमेरे-टू-टेलोमेरे’ (टी2टी) रेफरेंस जीनोम विकसित किया है, जो फसल का पूर्ण और बिना किसी अंतराल वाला आनुवांशिक खाका माना जाता है।

कृषि मंत्रालय ने मंगलवार को एक आधिकारिक बयान में कहा कि आईसीएआर ने अरहर की ‘आशा’ किस्म का ‘भारत का पहला पूर्णतः एनोटेट टी2टी रेफरेंस जीनोम’ विकसित किया है।

तुअर के नाम से भी चर्चित अरहर देश की प्रमुख दलहन फसलों में शामिल है। यह प्रोटीन का महत्वपूर्ण स्रोत होने के साथ खाद्य एवं पोषण सुरक्षा में अहम भूमिका निभाती है।

मंत्रालय ने कहा कि इस नवीन जीनोम अनुक्रम में लगभग 75 करोड़ 26.5 लाख डीएनए आधार जोड़े (बेस पेयर) शामिल हैं। इससे जलवायु के अनुकूल, अधिक पैदावार देने वाली और पोषण से भरपूर अरहर किस्मों के विकास में तेजी आने की उम्मीद है।

उल्लेखनीय है कि आईसीएआर-नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर प्लांट बायोटेक्नोलॉजी ने वर्ष 2011 में अरहर का पहला जीनोम प्रारूप प्रकाशित किया था, जिसे 2017 में और बेहतर बनाया गया था।

मंत्रालय ने कहा कि यह उपलब्धि देश के दलहन अनुसंधान पारिस्थिकी तंत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और इससे वैज्ञानिकों तथा किसानों को लाभ होगा।

केंद्र सरकार ने दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए ‘दलहन में आत्मनिर्भरता’ मिशन शुरू किया है, जिसका लक्ष्य वर्ष 2030-31 तक उत्पादन बढ़ाकर लगभग 3.5 करोड़ टन करना है।

भाषा राजेश राजेश प्रेम

प्रेम


लेखक के बारे में