आईएफएडी, भारत ने आठ साल की ग्रामीण विकास रणनीति पहल शुरू की
आईएफएडी, भारत ने आठ साल की ग्रामीण विकास रणनीति पहल शुरू की
नयी दिल्ली, 12 मई (भाषा) अंतरराष्ट्रीय कृषि विकास कोष (आईएफएडी) और भारत ने मंगलवार को ग्रामीण आय बढ़ाने और देश को अफ्रीका, दक्षिण-पूर्व एशिया और लातिनी अमेरिका में कृषि विकास मॉडल के निर्यातक के रूप में स्थापित करने के लिए आठ साल की रणनीति शुरुआत की।
राजधानी के भारत मंडपम में एक समारोह में पेश किए गए कंट्री स्ट्रेटेजिक ऑपर्च्युनिटीज़ प्रोग्राम (सीओएसओपी) 2026–33 के दो उद्देश्य हैं — ग्रामीण समुदायों की आर्थिक और जलवायु सहिष्णुता को मजबूत करना, और घरेलू स्तर पर तथा पूरे वैश्विक दक्षिण में आजमाए हुए विकास मॉडल का विस्तार करना।
अंतरराष्ट्रीय कृषि विकास कोष ने एक बयान में कहा कि यह रणनीति भारत के ‘विकसित भारत@2047’ विकास दृष्टिकोण के अनुरूप है और दो दशक के संयुक्त कार्यक्रमों पर आधारित है।
महाराष्ट्र में, लगभग दस लाख महिलाओं ने स्वयं सहायता समूह संघों के माध्यम से अपना ऋण इतिहास बनाया है, जिससे उन्हें बैंकों से 1,300 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण मिला है और ऋण चुकाने की दर लगभग 99 प्रतिशत तक पहुंच गई है।
मेघालय में, साझा शीत भंडार गृह और लॉजिस्टिक्स बुनियादी ढांचे ने छोटे किसानों को दुबई जैसे दूरदराज के स्थानों में खरीदारों को अपनी उपज बेचने में सक्षम बनाया है।
इस कार्यक्रम में आईएफएडी के सहायक उपाध्यक्ष, डोनल ब्राउन ने कहा, ‘‘हम मिलकर जो बना रहे हैं, वह केवल परियोजनाओं का एक संग्रह नहीं है, बल्कि यह एक ऐसी प्रणाली है जो संस्थानों, वित्त, बुनियादी ढांचे और बाजारों को आपस में जोड़ती है।’
यह कार्यक्रम सामुदायिक संस्थानों, स्वयं सहायता समूहों, किसान-उत्पादक संगठनों और सहकारी समितियों को छोटे किसानों को वित्त, प्रौद्योगिकी और बाजारों से जोड़ने के प्रयासों के केंद्र में रखता है।
आईएफएडी ने कहा कि वह सह-वित्तपोषण जुटाने और भारत के नीतिगत ढांचे के भीतर आजमाए हुए दृष्टिकोण को शामिल करने पर ध्यान केंद्रित करेगा।
इस अवसर पर, आईएफएडी ने ग्रामीण वित्त का विस्तार करने और छोटे किसानों तथा कृषि-उद्यमों के लिए मिश्रित वित्त साधनों को विकसित करने को राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के साथ एक रणनीतिक साझेदारी पर हस्ताक्षर किए।
आर्थिक मामलों के विभाग की सचिव अनुराधा ठाकुर ने कहा कि यह साझेदारी केवल गरीबी उन्मूलन के बुनियादी प्रयासों से आगे बढ़कर ‘‘सतत, बाजार-उन्मुख ग्रामीण आजीविका की ओर बढ़ी है, जो जलवायु और आर्थिक झटकों का सामना करने में सक्षम है।’’
भाषा राजेश राजेश अजय
अजय

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