भारत को पुनर्बीमा का वैश्विक केंद्र बनाने में आईएफएससीए की अहम भूमिकाः वित्तीय सेवा सचिव
भारत को पुनर्बीमा का वैश्विक केंद्र बनाने में आईएफएससीए की अहम भूमिकाः वित्तीय सेवा सचिव
नयी दिल्ली, 19 जनवरी (भाषा) वित्तीय सेवा सचिव एम नागराजू ने सोमवार को कहा कि अंतरराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण (आईएफएससीए) भारत को वैश्विक पुनर्बीमा केंद्र बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभा रहा है और भारतीय बीमाकर्ताओं एवं पुनर्बीमाकर्ताओं को गिफ्ट सिटी के जरिये वैश्विक अवसरों का लाभ उठाना चाहिए।
नागराजू ने मुंबई में आयोजित ‘आईएफएससी–आईआरडीएआई–गिफ्ट सिटी वैश्विक पुनर्बीमा शिखर सम्मेलन’ को संबोधित करते हुए यह बात कही।
वित्त मंत्रालय के बयान के मुताबिक, नागराजू ने कहा कि भारत का पुनर्बीमा क्षेत्र रूपांतरकारी वृद्धि के दौर में है और यह देश की समग्र आर्थिक आकांक्षाओं को मजबूती प्रदान करेगा।
उन्होंने कहा कि बीमा एवं पुनर्बीमा क्षेत्र भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था में मजबूत भूमिका निभाने में मददगार हैं क्योंकि ये जोखिम प्रबंधन के साथ दीर्घकालिक पूंजी भी उपलब्ध कराते हैं।
वित्तीय सेवा सचिव ने ‘स्विस री’ की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि वर्ष 2024 में भारत कुल प्रीमियम मात्रा के आधार पर दुनिया का 10वां सबसे बड़ा बीमा बाजार बना रहा और उसकी वैश्विक हिस्सेदारी 1.8 प्रतिशत रही।
देश की 3.7 प्रतिशत जनसंख्या ही बीमा दायरे में है जिसमें जीवन बीमा 2.7 प्रतिशत और गैर-जीवन बीमा एक प्रतिशत है। बीमा घनत्व बढ़कर 97 डॉलर हो गया जो यह दर्शाता है कि बाजार में अभी भी व्यापक अवसर मौजूद हैं।
सचिव ने कहा कि सरकार और बीमा नियामक ने क्षेत्र के विस्तार और बीमा की पहुंच बढ़ाने के लिए कई नीतिगत सुधार किए हैं। बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) की सीमा बढ़ाकर 100 प्रतिशत कर दी गई है और पिछले वर्ष एक नया पुनर्बीमाकर्ता भी पंजीकृत किया गया।
उन्होंने ‘सबका बीमा, सबकी रक्षा’ (बीमा कानून संशोधन) अधिनियम, 2025 का भी उल्लेख किया, जिसके तहत पॉलिसीधारकों के शिक्षा एवं संरक्षण कोष का गठन, डेटा संरक्षण कानून के साथ तालमेल और बीमा नियामक की शक्तियों को मजबूत किया गया है।
नागराजू ने कहा कि आईएफएससीए के तहत गिफ्ट सिटी अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप काम कर रही है और विदेशी पुनर्बीमाकर्ताओं को भारत में परिचालन के लिए आकर्षक मंच प्रदान कर रही है।
उन्होंने कहा कि सभी हितधारकों के सहयोग से ‘2047 तक सभी को बीमा’ का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है।
भाषा प्रेम
प्रेम रमण
रमण


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