लखनऊ, 17 मार्च (उप्र) उत्तर प्रदेश सरकार ने एक अप्रैल से अंडों पर उसके उपयोग की आखिरी तारीख (एक्सपायरी) दर्ज करने का निर्णय लिया है और दवाओं के पत्तों की तरह अंडों पर भी यह प्रयोग होगा। एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को यह जानकारी दी।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार, एक अप्रैल से अंडा उत्पादकों के लिए एक्सपायरी डेट का उल्लेख करना अनिवार्य कर दिया गया है। मंगलवार को राज्य सरकार के पशुपालन विभाग के अपर मुख्य सचिव (एसीएस) मुकेश मेश्राम ने बताया कि अंडा उत्पादकों को हर अंडे पर उत्पादन की तारीख और एक्सपायरी की तारीख की मुहर लगानी होगी।
उन्होंने यह भी बताया कि लगभग 30 डिग्री सेल्सियस के सामान्य तापमान पर रखे गए अंडों का इस्तेमाल, अंडे दिए जाने की तारीख से दो सप्ताह के अंदर कर लेना चाहिए; और जब अंडों को दो डिग्री सेल्सियस से आठ डिग्री सेल्सियस के बीच के रेफ्रिजरेशन तापमान पर रखा जाता है, तो उनका इस्तेमाल अंडे दिए जाने की तारीख से पांच सप्ताह के अंदर किया जा सकता है।
सीतापुर जिले में एक पॉल्ट्री फार्म के मालिक बालेश्वर वर्मा ने पीटीआई-भाषा को बताया कि यह फ़ैसला हाल ही में एपीसी (कृषि उत्पादन आयुक्त) दीपक कुमार की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में लिया गया था।
वर्मा ने कहा, ‘‘यह फ़ैसला लिया गया कि एक अप्रैल से अंडों पर उत्पादन की तारीख और एक्सपायरी की तारीख लिखना अनिवार्य होगा, ताकि उपभोक्ता जान सकें कि अंडा कितना अच्छा/ताज़ा है। यह ठीक वैसा ही है जैसा दवाओं की स्ट्रिप्स और बोतल पर एक्सपायरी और उत्पादन की तारीख लिखी होती है।’
उन्होंने बताया कि अंडों पर मोहर लगाने के लिए फ़ूड-ग्रेड इंक (स्याही) का इस्तेमाल किया जाएगा। निर्देश दिए गए हैं कि जिन अंडों को सामान्य तापमान पर रखा जाएगा, उन पर गुलाबी स्याही का इस्तेमाल किया जाए; जबकि जिन अंडों को शीत भंडार गृहों में रखा जाएगा, उन पर मुहर लगाने के लिए नीली स्याही का इस्तेमाल किया जाएगा। वर्मा ने कहा कि अगर अंडों पर कोई मुहर नहीं लगी होगी, तो उन्हें ‘खाने के लिए अनुपयुक्त’ माना जाएगा और फिर उन्हें ‘नष्ट’ कर दिया जाएगा।
भाषा अरुणव आनन्द
अमित अजय
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