नयी दिल्ली, 17 मार्च (भाषा) पश्चिम एशिया में युद्ध के कारण आयातित खाद्य तेलों (विशेषकर सोयाबीन, सूरजमुखी तेल) की आवक प्रभावित रहने के बीच देश के तेल-तिलहन बाजार में मंगलवार को सरसों एवं मूंगफली तेल-तिलहन, सोयाबीन तेल, कच्चा पामतेल (सीपीओ) एवं पामोलीन तथा बिनौला तेल के दाम में सुधार रहा। दूसरी ओर, महाराष्ट्र में सहकारी संस्थाओं की निरंतर बिकवाली से सोयाबीन तिलहन के दाम में गिरावट देखी गई।
शिकॉगो एक्सचेंज में दो प्रतिशत से ज्यादा की मजबूती है। जबकि शाम के कारोबार के दौरान मलेशिया एक्सचेंज में भी मजबूती है।
बाजार सूत्रों ने कहा कि महाराष्ट्र में सरकार की ओर से सहकारी संस्थायें सोयाबीन की सतत बिकवाली जारी रखे हुए हैं और इस बिकवाली के कारण सोयाबीन तिलहन के दाम में गिरावट आई है। सोयाबीन के डी-आयल्ड केक या तेल रहित खल (डीओसी) की कमजोर मांग से भी इस गिरावट को और बल मिला।
उन्होंने कहा कि सरकार को सोयाबीन की बिकवाली रोकने और उसका स्टॉक बनाने के बारे में विचार करना चाहिये। हालांकि, यह बिकवाली लगभग 5,400 रुपये प्रति क्विंटल के दाम पर हो रही है जो 5,328 रुपये प्रति क्विंटल के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से अधिक है। लेकिन इस कीमत में मंडी शुल्क, वारदाना तथा अन्य कई खर्च शामिल हैं। इन खर्चो को अलग कर दें तो दाम एमएसपी से कम ही है। दूसरी ओर, किसानों को पहले सोयाबीन के अच्छे दाम मिल चुके हैं और वे मौजूदा कम दाम पर बिकवाली से बच रहे हैं। लगभग दो महीने के बाद सोयाबीन की बिजाई होगी और सोयाबीन का स्टॉक बनाने से किसी अप्रत्याशित स्थिति में इसे उपयोग में लाया जा सकेगा।
उन्होंने कहा कि युद्ध के मद्देनजर आयातित सोयाबीन तेल की कम उपलब्धता रहने तथा शिकॉगो एक्सचेंज में मजबूती के बीच सोयाबीन तेलों के दाम मजबूत रहे।
सूत्रों ने कहा कि कुछ ऐसे समीक्षक हैं जिनका सरसों से संबंधित तेल संगठन से कोई रिश्ता नहीं है लेकिन वे सरसों के बारे में मनमाने ढंग से बाजार में इसकी आवक के अनुमान को कभी घटा देते हैं तो कभी बढ़ा देते हैं। इस पर नजर रखने की आवश्यकता है। ऐसा कोई अनुमान सरसों से जुड़े तेल संगठनों को ही जारी करना उचित है।
उन्होंने कहा कि सोयाबीन तेल के कम आयात की वजह से इसकी कमी को पूरा करने का असर अन्य तेल-तिलहनों पर आया है। देश खाद्य तेलों की लगभग 60 प्रतिशत जरूरत को पूरा करने के लिए आयात पर निर्भर है और इस आयात में एक महत्वपूर्ण हिस्सा सोयाबीन तेल का है जिसका आयात युद्ध की परिस्थितियों में प्रभावित हुआ है। इससे यहां बाजार की कारोबारी धारणा मजबूत हुई है और कई अन्य तेल-तिलहनों के दाम मजबूत हो गये हैं।
तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन – 6,700-6,725 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली – 7,200-7,675 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) – 17,500 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल – 2,760-3,060 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 13,925 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 2,355-2,455 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 2,355-2,500 रुपये प्रति टिन।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 15,400 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 14,850 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 11,950 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 13,075 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 14,175 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 14,775 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 13,725 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना – 5,525-5,575 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज- 5,125-5,275 रुपये प्रति क्विंटल।
भाषा राजेश राजेश अजय
अजय