नयी दिल्ली, 28 सितंबर (भाषा) देश में विमान ईंधन की मांग 2031 तक बढ़कर 2,77,000 बैरल प्रतिदिन हो सकती है, जो 2024 में करीब 1,92,000 बैरल प्रतिदिन थी। इससे हरित यानी सतत विमान ईंधन (एसएएफ) के लिए मजबूत बाजार तैयार होगा। सोमवार को जारी एक रिपोर्ट में यह अनुमान लगाया गया।
सरकार ने विमानन क्षेत्र से कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए एसएएफ मिश्रण की रूपरेखा घोषित की है। इसके तहत 2027 में एक प्रतिशत, 2028 में दो प्रतिशत और 2030 में पांच प्रतिशत एसएएफ मिश्रण का लक्ष्य रखा गया है।
एसएंडपी ग्लोबल एनर्जी और एसएएफ एसोसिएशन की संयुक्त रूप से तैयार रिपोर्ट के अनुसार, एसएएफ की मांग 2027 में 46,000 टन और 2030 तक बढ़कर 2,50,000 टन हो सकती है।
हरित विमान ईंधन पर एसएएफ एसोसिएशन द्वारा आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन के पहले दिन सोमवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया कि भारत का विमानन क्षेत्र 2060 तक परिष्कृत पेट्रोलियम उत्पादों की मांग के सबसे तेजी से बढ़ने वाले स्रोतों में शामिल होगा। इससे घरेलू एसएएफ बाजार के विकास के लिए मजबूत आधार तैयार होगा।
रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘इस विस्तार का कारण मध्यम वर्ग की बढ़ती आवाजाही, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा में लगातार वृद्धि, हवाई अड्डों के बुनियादी ढांचे के विकास और एयरलाइन कंपनियों के बेड़े में लगातार बढ़ोतरी है।’’
रिपोर्ट में कहा गया कि 2026 में, खासकर अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में, कुछ समय के लिए मांग में कमी आई है, लेकिन दीर्घकालिक मांग का रुख सकारात्मक बना हुआ है।
इसमें कहा गया, ‘‘2026 के मध्य में भारत में विमान ईंधन की खपत में कमी आई और जुलाई में मांग घटकर करीब 1,80,000 बैरल प्रतिदिन रह गई। इसका कारण उड़ानों में कमी, परिचालन लागत में वृद्धि और आपूर्ति से जुड़ी बाधाएं रहीं।’’
हालांकि, 2026 की पहली छमाही में विमान ईंधन की खपत सालाना आधार पर करीब दो प्रतिशत बढ़ी। इससे संकेत मिलता है कि हाल की सुस्ती अस्थायी है और इसका दीर्घकालिक वृद्धि की संभावनाओं पर असर नहीं पड़ा है।
रिपोर्ट में कहा गया कि यात्रियों की बढ़ती संख्या, कम लागत वाली विमान सेवाओं के विस्तार और अंतरराष्ट्रीय हवाई संपर्क में वृद्धि से भी मांग की संभावनाओं को समर्थन मिल रहा है।
नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और नोएडा में जेवर हवाई अड्डे समेत नए बुनियादी ढांचे से क्षमता संबंधी बाधाएं कम होने और उड़ानों की संख्या में अतिरिक्त वृद्धि होने की उम्मीद है।
एसएएफ एसोसिएशन के महासचिव रोहित कुमार ने रिपोर्ट में लिखा है, ‘‘भारत सतत विमान ईंधन (एसएएफ) के विकास के लिहाज से एक महत्वपूर्ण दौर में है। दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते विमानन बाजारों में शामिल भारत के पास न केवल अधिक स्वच्छ विमानन क्षेत्र विकसित करने, बल्कि कृषि, अपशिष्ट प्रबंधन, ऊर्जा, रिफाइनिंग, प्रौद्योगिकी, वित्त और विमानन को मिलाकर एक नया औद्योगिक परिवेश तैयार करने का भी अवसर है।’’
रिपार्ट के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय विमानन क्षेत्र मांग बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। 2026 में अधिक टिकट कीमतों के बावजूद अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में सीटों की क्षमता घरेलू उड़ानों की तुलना में तेजी से बढ़ रही है।
इसमें कहा गया, ‘‘विमानन क्षेत्र की वृद्धि को बनाए रखने में सरकारी नीतियों का भी महत्वपूर्ण योगदान होगा। एक प्रमुख संरचनात्मक कारक सरकार का उड़ान (उड़े देश का आम नागरिक) क्षेत्रीय संपर्क योजना के जरिये हवाई संपर्क बढ़ाने पर लगातार जोर देना है।’’
भाषा रमण अजय
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