वैश्विक वित्त के भविष्य का स्वरूप तय करने में भरोसेमंद भागीदार बन सकता है भारत : आरबीआई गवर्नर

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वैश्विक वित्त के भविष्य का स्वरूप तय करने में भरोसेमंद भागीदार बन सकता है भारत : आरबीआई गवर्नर

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  • Publish Date - September 10, 2026 / 05:39 PM IST,
    Updated On - September 10, 2026 / 05:39 PM IST

मुंबई, 10 सितंबर (भाषा) भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत के पास वैश्विक वित्त की भावी व्यवस्था का ढांचा निर्धारित करने में एक भरोसेमंद भागीदार बनने का अवसर है।

उन्होंने यहां वैश्विक फिनटेक सम्मेलन में कहा कि केंद्रीय बैंक अगली पीढ़ी की वित्तीय सेवाओं के लिए डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना तैयार करने पर भी काम कर रहा है। उन्होंने एकीकृत ऋण सुविधा (यूएलआई) का उदाहरण दिया।

मल्होत्रा ने कहा कि भारत का वित्तीय प्रौद्योगिकी परिवेश दुनिया में तीसरे स्थान पर है और देश में इस क्षेत्र के 30 यूनिकॉर्न (एक अरब डॉलर से अधिक मूल्यांकन वाले स्टार्टअप) हैं।

उन्होंने यह भी घोषणा की कि केंद्रीय बैंक और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) आज ही कंपनी बॉन्ड के लिए ‘टोकन’ व्यवस्था की शुरुआत करेंगे।

आरबीआई गवर्नर ने वित्तीय प्रणाली की सफलता में ‘भरोसे’ को केंद्रीय तत्व बताते हुए कहा कि वित्तीय प्रौद्योगिकी कंपनियों को आंकड़ों या निजी सूचना को कारोबारी संपत्ति के रूप में नहीं, बल्कि ग्राहकों के हितों की रक्षा की जिम्मेदारी के रूप में देखना चाहिए।

मल्होत्रा ने यह भी घोषणा की कि रिजर्व बैंक ने वित्तीय क्षेत्र के लिए दूसरे स्व-नियामक संगठन के रूप में ‘यूनाइटेड फिनटेक फोरम’ को मंजूरी दी है।

इससे पहले फिनटेक एसोसिएशन फॉर कंज्यूमर एम्पावरमेंट (एफएसीई) को स्व-नियामक संगठन के रूप में मान्यता दी गई थी।

भाषा रमण अजय

अजय