यह व्यवस्था के हाथों की गयी एक हत्या है: अभ्यर्थी की आत्महत्या पर दीपके ने कहा

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यह व्यवस्था के हाथों की गयी एक हत्या है: अभ्यर्थी की आत्महत्या पर दीपके ने कहा

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  • Publish Date - September 10, 2026 / 05:13 PM IST,
    Updated On - September 10, 2026 / 05:13 PM IST

धाराशिव, 10 सितंबर (भाषा) कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बृहस्पतिवार को महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (एमपीएससी) की परीक्षाओं की तैयारी में जुटे अभ्यर्थी प्रथमेश देशमुख की कथित आत्महत्या को ‘व्यवस्था द्वारा की गई हत्या’ करार दिया और कहा कि सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

उन्होंने यह भी कहा कि लोग आरक्षण की मांग कर रहे हैं क्योंकि सरकार युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और रोजगार उपलब्ध कराने में पूरी तरह विफल रही है।

एमपीएससी की परीक्षाओं की तैयारी में जुटे देशमुख (28) ने कथित तौर पर पुणे में आत्महत्या कर ली थी।

उनके द्वारा छोड़े गए सुसाइड नोट में उनपर करीब 2.5 लाख रुपये के कर्ज का जिक्र था। वह धाराशिव जिले के परांडा के रहने वाले थे और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान पुणे के नवी पेठ इलाके में किराये के मकान में रह रहे थे।

दीपके ने बृहस्पतिवार को धाराशिव के खासापुरी गांव का दौरा किया और देशमुख के शोकाकुल परिवार के सदस्यों से मुलाकात की।

बाद में संवाददाताओं से बातचीत करते हुए दीपके ने कहा कि देशमुख नौकरी पाने और अपने परिवार को गरीबी से बाहर निकालने के सपने के साथ पुणे गया था।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘उसने अपने खर्चों को पूरा करने के लिए दोस्तों से पैसे उधार लिए थे। लेकिन पेपर लीक और परिणामों में देरी के कारण छात्रों पर दबाव बढ़ता गया। यह (देशमुख की आत्महत्या) व्यवस्था की गलती है और यह व्यवस्था द्वारा की गई हत्या है।’’

कॉजपा के संयोजक ने कहा कि देशमुख ने व्यवस्था, बेरोजगारी और ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं की आर्थिक स्थिति से परेशान होकर यह कठोर कदम उठाया।

दीपके ने कहा, ‘‘प्रथमेश पुणे में रहता था और अपनी आर्थिक स्थिति के कारण दिन में केवल एक बार खाना खाता था। उसकी मां के अनुसार, प्रथमेश कहा करता था कि वह सरकारी गाड़ी से घर आएगा, लेकिन दुर्भाग्य से कल उसे एंबुलेंस से यहां लाया गया। उसके पिता का पहले ही निधन हो चुका है।’’

उन्होंने कहा कि एमपीएससी की परीक्षाओं की तैयारी के लिए ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले अभ्यर्थियों के सामने पुणे जैसे शहर में अपने खर्चों को पूरा करने की चुनौती होती है।

भाषा संतोष माधव

माधव