भारत ने मलेशिया, तिमोर-लेस्त और म्यांमा के साथ कृषि सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की

भारत ने मलेशिया, तिमोर-लेस्त और म्यांमा के साथ कृषि सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की

भारत ने मलेशिया, तिमोर-लेस्त और म्यांमा के साथ कृषि सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की
Modified Date: September 10, 2026 / 01:01 pm IST
Published Date: September 10, 2026 1:01 pm IST

नयी दिल्ली, 10 सितंबर (भाषा) भारत ने कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए मलेशिया, तिमोर-लेस्त और म्यांमा के साथ अलग-अलग द्विपक्षीय बातचीत की। आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गई।

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को यहां नौवीं आसियान-भारत कृषि एवं वानिकी मंत्रिस्तरीय बैठक (एआईएमएमएएफ) से इतर तीनों देशों के अपने समकक्षों से मुलाकात की।

एआईएमएमएएफ का आयोजन कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डीएआरई) और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने किया।

बुधवार को जारी बयान में कहा गया कि मलेशिया के कृषि एवं खाद्य सुरक्षा मंत्री मोहम्मद बिन साबू के साथ बैठक में चौहान ने प्रस्तावित सहमति ज्ञापन (एमओयू) के जरिये संयुक्त कृषि अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग मजबूत करने पर चर्चा की।

इसमें कहा गया कि दोनों मंत्रियों ने माना कि आनुवंशिक संसाधनों के आदान-प्रदान, व्यापार और बाजार तक पहुंच से जुड़े द्विपक्षीय मुद्दों का सहयोग के जरिये समाधान किया जा सकता है।

बयान के अनुसार, तिमोर-लेस्त के कृषि, पशुधन, मत्स्य पालन एवं वानिकी मंत्री मार्कोस दा क्रूज ने बैठक में कृषि संबंधी चुनौतियों से निपटने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत के साथ मजबूत संस्थागत व्यवस्था बनाने का आग्रह किया।

इसमें कहा गया कि चौहान ने वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों के आदान-प्रदान और मानव संसाधन विकास के जरिये तिमोर-लेस्त की मदद करने के लिए भारत की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियां साझा करने की प्रतिबद्धता दोहराई।

दा क्रूज ने कृषि, वानिकी, पशुधन और जलीय कृषि क्षेत्र की जमीनी स्तर की चुनौतियों का आकलन करने के लिए भारतीय तकनीकी एवं वैज्ञानिक विशेषज्ञों का एक दल भेजने का भी अनुरोध किया।

बयान के अनुसार, म्यांमा के कृषि, पशुधन एवं सिंचाई मामलों के केंद्रीय मंत्री मिन नौंग के साथ बैठक में चौहान ने कहा कि दोनों देशों के बीच करीब 1,600 किलोमीटर लंबी सीमा के अलावा करीबी सांस्कृतिक संबंध भी हैं।

दोनों पक्षों ने कहा कि कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में सहयोग मजबूत करने के लिए दोनों देशों के बीच सहमति ज्ञापन (एमओयू) को अंतिम रूप देने का काम काफी आगे बढ़ चुका है। उन्होंने दालों, कपास, डेयरी और कृषि शिक्षा के क्षेत्र में व्यापार बढ़ाने की संभावनाओं पर भी चर्चा की।

बयान के अनुसार, म्यांमा की ओर से आर्थिक और कृषि संबंधों को मजबूत करने के लिए अनुकूल निवेश अवसरों का सुझाव दिया गया।

बैठकों के दौरान डीएआरई के सचिव एवं आईसीएआर के महानिदेशक एम. एल. जाट, डीएआरई के अतिरिक्त सचिव एवं आईसीएआर के उप महानिदेशक ज्ञानेंद्र देव त्रिपाठी, अंतरराष्ट्रीय सहयोग के संयुक्त सचिव ए के साहू, आईसीएआर के सभी उप महानिदेशक और नवीन पी. सिंह के नेतृत्व वाला अंतरराष्ट्रीय संबंध दल भी मौजूद था।

भाषा निहारिका

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