नयी दिल्ली, 27 जनवरी (भाषा) भारत और यूरोपीय संघ ने मंगलवार को मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए बातचीत पूरी होने की घोषणा की। एक अधिकारी ने बताया कि इस समझौते के तहत परिधान, रसायन और जूते-चप्पल जैसे कई घरेलू क्षेत्रों को 27 देशों के इस समूह में शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलेगा। वहीं, यूरोपीय संघ (ईयू) को कारों और वाइन के लिए रियायती शुल्क पर भारतीय बाजार तक पहुंच प्राप्त होगी।
दो दशकों से अधिक समय तक चली बातचीत के बाद संपन्न हुए इस समझौते को ‘अबतक का सबसे बड़ा’ समझौता कहा गया है। यह लगभग दो अरब लोगों का बाजार तैयार करेगा।
अधिकारी ने कहा कि वाहन और इस्पात को छोड़कर, भारत के लगभग सभी सामानों (93 प्रतिशत से अधिक) को यूरोपीय संघ में शून्य-शुल्क पहुंच मिलेगी। बाकी छह प्रतिशत से अधिक वस्तुओं के लिए भारतीय निर्यातकों को शुल्क में कटौती और कोटा-आधारित शुल्क रियायतें (जैसे ऑटोमोबाइल के लिए) मिलेंगी।
यूरोपीय संघ इस मुक्त व्यापार समझौते के लागू होने के साथ ही पहले दिन भारत के 90 प्रतिशत सामानों पर आयात शुल्क समाप्त कर देगा। यह समझौता अगले साल की शुरुआत में लागू होने की उम्मीद है। अन्य तीन प्रतिशत वस्तुओं पर शुल्क को सात वर्षों में चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जाएगा।
अधिकारी ने कहा, ”इस प्रकार ईयू द्वारा भारत को व्यापार मूल्य के 99.5 प्रतिशत हिस्से पर रियायतें दी जा रही हैं।”
दूसरी ओर, यूरोपीय संघ को भारत में दस वर्षों की अवधि में अपने 93 प्रतिशत सामानों के लिए शुल्क-मुक्त पहुंच मिलेगी। भारत समझौते को लागू करने के पहले दिन यूरोपीय वस्तुओं के केवल 30 प्रतिशत हिस्से पर शुल्क हटाएगा।
भारत यूरोपीय संघ को व्यापार मूल्य के 3.7 प्रतिशत हिस्से पर शुल्क रियायतें और कोटा-आधारित कटौती भी दे रहा है। कुल मिलाकर, भारत ईयू को व्यापार मूल्य के 97.5 प्रतिशत पर शुल्क रियायतें दे रहा है।
अधिकारी ने बताया कि शुल्क-मुक्त पहुंच पाने वाले प्रमुख भारतीय क्षेत्रों में कपड़ा, परिधान, समुद्री उत्पाद, रसायन, प्लास्टिक, रबर, चमड़ा और जूते-चप्पल शामिल हैं। इसके अलावा आधार धातु, रत्न और आभूषण, फर्नीचर, खिलौने और खेल के सामान को भी यह लाभ मिलेगा।
इस समय इन क्षेत्रों पर यूरोपीय संघ में शून्य से 26 प्रतिशत तक शुल्क लगता है। भारत ने एफटीए के तहत ईयू की वस्तुओं के लिए भी शुल्क को उदार बनाया है।
अधिकारी ने कहा, ”हमारे मामले में, भारत 10 वर्षों में ईयू के लिए आयात शुल्क को घटाकर शून्य कर देगा। शुरुआत में शून्य तक की कमी सीमित है। समझौते के लागू होने पर हम अपने व्यापार मूल्य के 30 प्रतिशत तक की कटौती करेंगे। लेकिन धीरे-धीरे, हम अपने कुल द्विपक्षीय व्यापार मूल्य के 93 प्रतिशत पर शून्य तक पहुंच जाएंगे।”
सेवाओं के मोर्चे पर यूरोपीय संघ ने भारत को अपने अब तक के सबसे अच्छे प्रस्तावों में से एक दिया है। उसने 155 उप-क्षेत्रों में 144 को खोल दिया है, जबकि भारत उनके लिए 102 उप-क्षेत्र खोल रहा है।
अधिकारी ने कहा कि इसके अलावा छात्रों की आवाजाही को लेकर भी प्रतिबद्धताएं हैं। उन्होंने कहा, ”हमारे पास यूरोपीय संघ से पढ़ाई के बाद कामकाजी वीजा पर भी कुछ प्रतिबद्धताएं हैं।”
वस्तुओं और सेवाओं के व्यापार के अलावा, एफटीए में डिजिटल व्यापार, स्वच्छता एवं पादप स्वच्छता उपायों, व्यापार में तकनीकी बाधाओं और बौद्धिक संपदा अधिकारों पर अध्याय शामिल हैं। इसमें ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों और सरकारी खरीद पर कोई अध्याय नहीं है।
यूरोपीय संघ का औसत शुल्क पहले से ही कम है। ये लगभग 3.8 प्रतिशत हैं और व्यापार सौदे के तहत उन्हें भारत के लिए घटाकर 0.1 प्रतिशत कर दिया जाएगा।
कुछ क्षेत्रों में शुल्क अधिक हैं। इनमें समुद्री उत्पाद, रसायन, प्लास्टिक और रबर शामिल हैं। इन सभी पर यूरोपीय संघ व्यापार सौदे के तहत भारत के लिए शुल्क समाप्त कर देगा। वर्ष 2024 में इन क्षेत्रों से भारत का निर्यात कुल 35 अरब डॉलर था। कार्यान्वयन के पहले दिन 33.5 अरब डॉलर पर शुल्क हटा दिया जाएगा। बाकी पर यह तीन, पांच और सात वर्षों में ‘शून्य’ हो जाएगा।
ऑटोमोबाइल में दोनों पक्षों ने कोटा आधारित शुल्क रियायतों पर बातचीत की है, क्योंकि इस क्षेत्र में यूरोपीय संघ की मांग बहुत आक्रामक है।
भारत का ऑटो क्षेत्र काफी हद तक छोटी कारों (खुदरा कीमतें 10 लाख रुपये से 25 लाख रुपये) के दबदबे वाला है। इस खंड में यूरोपीय संघ की रुचि बहुत अधिक नहीं है।
अधिकारी ने कहा, ”हमने तय किया है कि जो कारें इस देश में 25 लाख रुपये से कम में बिकने वाली हैं, ईयू उन कारों का भारत में निर्यात नहीं करेगा। वे इनका निर्माण यहां कर सकते हैं।”
दूसरी ओर 25 लाख रुपये से ऊपर भारत का बाजार सीमित है, लेकिन ईयू की इसमें रुचि अधिक है क्योंकि वे इस खंड में अच्छे निर्माता हैं। इस समय ऑटोमोबाइल पर भारत का आयात शुल्क 66 प्रतिशत से 125 प्रतिशत तक है। भारत कोटे से बाहर कोई शुल्क कटौती नहीं देगा। इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए भारत का कोटा समझौते के पांचवें वर्ष से शुरू होगा।
ईवी के लिए शुल्क कटौती अलग-अलग खंड में भिन्न होगी। अधिकारी ने कहा, ”पहले साल में कुछ खंड में यह 35 फीसदी और कुछ में 30 फीसदी होगी। फिर यह धीरे-धीरे नीचे जाएगी।”
भारत डेयरी (पनीर सहित), सोया मील और अनाज क्षेत्रों में कोई शुल्क रियायत नहीं देगा। यूरोपीय संघ भी अपने चीनी, बीफ, मांस और पोल्ट्री क्षेत्रों की रक्षा कर रहा है।
भारत को यूरोपीय संघ में ‘टेबल ग्रेप्स’ (खाने वाले अंगूर) के लिए कोटा आधारित शुल्क कटौती मिली है। यूरोपीय संघ सालाना लगभग 1.4 अरब डॉलर के टेबल ग्रेप्स का आयात करता है। अधिकारी ने कहा, ”हमें लगभग 10 करोड़ डॉलर यानी 85,000 टन अंगूरों के लिए शुल्क-मुक्त पहुंच मिली है।”
भारत सात वर्षों में शुल्क कम करेगा। उच्च मूल्य वाली वाइन पर शुल्क सात वर्षों में 150 प्रतिशत से गिरकर 20 प्रतिशत हो जाएगा। दूसरी ओर 2.5 यूरो से कम की वाइन के लिए कोई रियायत नहीं होगी।
मंत्रालय के एक अधिकारी के अनुसार इस समय दोनों पक्षों के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 136 अरब डॉलर है। समझौते के लागू होने पर तीन से चार वर्षों के भीतर इसके 200 अरब डॉलर को पार करने की उम्मीद है। इसी तरह सेवाओं का व्यापार, जो वर्तमान में लगभग 80-85 अरब डॉलर का है, बढ़कर 125 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है।
भाषा पाण्डेय रमण
रमण