मुक्त व्यापार समझौते से भारत-ईयू जैविक खाद्य कारोबारियों की उम्मीदें बढ़ीं

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मुक्त व्यापार समझौते से भारत-ईयू जैविक खाद्य कारोबारियों की उम्मीदें बढ़ीं

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  • Publish Date - February 12, 2026 / 11:35 AM IST,
    Updated On - February 12, 2026 / 11:35 AM IST

(राजेश राय)

न्यूर्नबर्ग (जर्मनी), 12 फरवरी (भाषा) भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के जैविक खाद्य कारोबारियों ने हाल में घोषित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को लेकर सकारात्मक रुख जताया और कहा है कि इससे दोनों पक्षों को बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी तथा इस क्षेत्र में बड़े अवसर उत्पन्न होंगे।

स्थायी खाद्य क्षेत्र से जुड़ी करीब 2,200 कंपनियां चार दिवसीय ‘बायोफैच 2026’ में अपने उत्पाद प्रदर्शित कर रही हैं। इनमें भारत के 100 से अधिक प्रतिभागी शामिल हैं। यह जैविक खाद्य उत्पादों का दुनिया का प्रमुख व्यापार मेला है, जो न्यूर्नबर्ग प्रदर्शनी केंद्र में आयोजित हो रहा है।

यह मेला ऐसे समय हो रहा है जब भारत और 27 देशों वाले यूरोपीय संघ ने लगभग दो दशकों की बातचीत के बाद 27 जनवरी को मुक्त व्यापार समझौते पर वार्ता पूरी होने की घोषणा की है। इसके करीब एक साल में हस्ताक्षरित और लागू होने की संभावना है।

जैविक खाद्य क्षेत्र के विशेषज्ञों के अनुसार, यह समझौता भारतीय जैविक उत्पाद निर्यातकों के लिए ईयू में करीब 60 अरब डॉलर के अवसर खोलता है। वहीं इससे ईयू देशों को भारत के 140 करोड़ उपभोक्ताओं का बाजार भी मिलेगा।

समझौते के तहत द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए दोनों पक्ष सैकड़ों वस्तुओं पर आयात शुल्क खत्म या कम करेंगे।

कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के चेयरमैन अभिषेक देव ने कहा, ‘‘ इस क्षेत्र में दोनों पक्षों के लिए बड़े अवसर हैं।’’

‘बायोफैच’ में भारत ‘कंट्री ऑफ द ईयर’ के रूप में प्रमुख उपस्थिति दर्ज करा रहा है।

वाणिज्य मंत्रालय के अधीन एपीडा मेले में भारत की भागीदारी का आयोजन कर रहा है, जिसमें देश की समृद्ध कृषि विरासत और जैविक उत्पादों के भरोसेमंद वैश्विक आपूर्तिकर्ता के रूप में उसकी बढ़ती पहचान को प्रदर्शित किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि व्यापार आगंतुकों को भारतीय जैविक उत्पादों, मूल्य सृजन मॉडल और साझेदारी के अवसरों की जानकारी दी जा रही है। भारत का जैविक खाद्य निर्यात 2024-25 में 66.7 करोड़ डॉलर रहा।

‘इंडिया कंट्री पैवेलियन’ का उद्घाटन वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने किया। इस अवसर पर मणिपुर के अतिरिक्त मुख्य सचिव विवेक देवांगन, बर्लिन स्थित भारतीय दूतावास में मंत्री (कार्मिक) मंदीप सिंह तुली तथा सहकारिता मंत्रालय के संयुक्त सचिव रमण कुमार भी मौजूद थे।

मेले में जैविक जूस व ‘स्नैक्स’ निर्माता, अनाज उत्पादक और गैर-मादक पेय कंपनियां हिस्सा ले रही हैं। इन्होंने एक स्वर में कहा कि यह समझौता इस क्षेत्र में व्यापार बढ़ाने में मदद करेगा।

फ्रांस जैसे क्षेत्रों की कई कंपनियां भारत में स्थानीय साझेदारों की तलाश में आक्रामक रुख अपना रही हैं।

एक ‘स्नैक’ निर्माता ने कहा, ‘‘ अगर भारत में मांग बढ़ती है, तो हम भारत में ही उत्पादन शुरू कर सकते हैं।’’

कर्नाटक स्थित जैविक बीज, जड़ी-बूटी और अनाज कारोबार से जुड़ी राजामुडी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी एवं सह-संस्थापक नागेंद्र कुमार एच. ने हालांकि कहा कि दोनों क्षेत्रों को प्रमाणन संबंधी मुद्दों पर काम करना होगा, जो फिलहाल निर्यात में बाधा बन रहे हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘ एफटीए से ईयू को निर्यात बढ़ाने में मदद मिलेगी, लेकिन सरकार को यूरोप में निर्यातकों पर अनुपालन बोझ से जुड़े मुद्दों को सुलझाना होगा। हम ईयू में भारतीय प्रवासी समुदाय की मांग को पूरा कर सकते हैं।’’

उन्होंने बताया कि उनकी कंपनी आयरलैंड, जर्मनी और नीदरलैंड को निर्यात कर रही है।

महाराष्ट्र स्थित जैविक फलों के जूस निर्माता आरयूएस ऑर्गेनिक की संस्थापक उज्वला ने कहा कि यूरोप में ऐसे उत्पादों की भारी मांग है।

उन्होंने कहा, ‘‘ फिलहाल हम इजराइल और दुबई को निर्यात कर रहे हैं। आगे विस्तार के लिए हम तीन करोड़ रुपये जुटाना चाहते हैं। अब तक करीब 20 करोड़ रुपये निवेश कर चुकी हूं। हम मौजूदा चार लाख बोतल प्रति माह की क्षमता को दोगुना करना चाहते हैं।’’

वर्ष 2019 में शुरू हुई यह स्टार्टअप कंपनी भारत के विभिन्न राज्यों से फल खरीदती है।

उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजारों में तेजी से बढ़ती मांग से कंपनी का कारोबार बढ़ेगा।

जैविक खाद्य क्षेत्र से जुड़े रेजैव के प्रबंध निदेशक (एमडी) के. एस. सिंघल ने कहा कि यह समझौता ईयू में भारतीय उत्पादों की पहुंच बढ़ाने में मदद करेगा।

यूरोप की कंपनियां भी मानती हैं कि भारत का 140 करोड़ उपभोक्ताओं का आधार उनके लिए बड़े कारोबारी अवसर लेकर आता है।

मोल्दोवा स्थित लैवेंडर ऑयल निर्माता फ्लोरल रेमेडी की संस्थापक स्टेला मेलनिक ने कहा कि वे भारत को निर्यात करने के इच्छुक हैं।

उन्होंने कहा, “ इस तेल का उपयोग सौंदर्य प्रसाधन उद्योग में होता है। हम भारत को निर्यात की योजना बना रहे हैं। आसान प्रमाणन प्रक्रियाएं हमारे लिए काफी मददगार होंगी।”

ऑस्ट्रिया की जैविक पेय विनिर्माण कंपनी होलिंगर के प्रबंध निदेशक एक्सेल फिला ने कहा कि उनकी कुछ भारतीय कंपनियों से “अच्छी” बातचीत हुई है और उनकी कंपनी इस समझौते का लाभ उठाकर भारत को निर्यात के अवसर तलाश रही है।

एपीडा के चेयरमैन ने कहा कि भारतीय सरकार जैविक प्रमाणन और परीक्षण प्रयोगशालाओं को मजबूत करने के लिए कदम उठा रही है।

दक्षिण-पूर्व एशिया और अफ्रीका जैसे अन्य क्षेत्रों की कंपनियां भी भारत को अपने जैविक उत्पादों का निर्यात बढ़ाना चाहती हैं।

दक्षिण अफ्रीका की एसेंशियल ऑयल विनिर्माता रोजहिप फार्म ने कहा कि उनके उत्पाद का इस्तेमाल सौंदर्य प्रसाधन और दवा उद्योग दोनों में होता है और वे भारतीय बाजार पर नजर बनाए हुए हैं।

रोजहिप फार्म की मालिक सेलेस्टे गेरिके ने कहा, ‘‘ फिलहाल हम भारत को निर्यात नहीं कर रहे हैं लेकिन निश्चित रूप से भारत में प्रवेश की योजना बना रहे हैं।’’

भाषा निहारिका मनीषा

मनीषा