नयी दिल्ली, 18 अगस्त (भाषा) भारत ने ‘क्लियर फ्लोट ग्लास’ के आयात पर एक साल के लिए 34,000 रुपये प्रति टन का न्यूनतम आयात मूल्य (एमआईपी) लागू किया है। इससे कम कीमत वाले आयात पर अंकुश लगने से सेंट-गोबेन और असाही इंडिया समेत घरेलू उत्पादकों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) ने 18 अगस्त की अधिसूचना में आईटीसी (एचएस) कोड 70051090 और 70052990 के तहत चार मिलीमीटर से 12 मिलीमीटर मोटाई वाले ‘क्लियर फ्लोट ग्लास’ की आयात नीति को ‘‘मुक्त’’ से बदलकर ‘‘अंकुश’’ की श्रेणी में डाल दिया।
सीआईएफ आधार पर 34,000 रुपये प्रति टन या उससे अधिक कीमत वाले आयात की अनुमति जारी रहेगी, जबकि इससे कम कीमत वाले आयात पर नई सीमा लागू होगी।
डीजीएफटी के अनुसार, न्यूनतम आयात मूल्य अधिसूचना प्रकाशित होने की तारीख से एक साल तक प्रभावी रहेगा।
अग्रिम प्राधिकरण धारकों, निर्यातोन्मुख इकाइयों और विशेष आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) की इकाइयों द्वारा किए जाने वाले आयात को इससे छूट दी गई है, बशर्ते आयातित सामग्री बाद में घरेलू शुल्क क्षेत्र में नहीं बेची जाए।
यह उपाय भारत की आयात नीति के अध्याय 70 के तहत बिना तार वाले ‘क्लियर फ्लोट ग्लास’ की दो श्रेणियों पर लागू होगा।
बिना तार वाला ‘क्लियर फ्लोट ग्लास’ एक पूरी तरह से सपाट, साफ तथा पारदर्शी कांच होता है।
नीति में बदलाव के तहत आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय कीमत की न्यूनतम सीमा तय की गई है। इससे मुख्य रूप से निर्धारित मानक से कम कीमत पर भारतीय बाजार में आने वाली खेप प्रभावित होने की उम्मीद है।
नई नीति डीजीएफटी की 18 अगस्त, 2026 की अधिसूचना संख्या 29/2026-27 के तहत प्रभावी हो गई है।
भाषा निहारिका अजय
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