शिलॉन्ग, 29 सितंबर (भाषा) भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधानों के कारण ऊर्जा आपूर्ति तथा कीमतों पर बढ़ते असर के बीच भारत को अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए घरेलू स्तर पर तेल की खोज और तकनीकी क्षमताओं को मजबूत करने की जरूरत है।
ऑयल इंडिया लिमिटेड के निदेशक (वित्त) अभिजीत मजूमदार ने इंडिया एनर्जी वीक (आईईडब्ल्यू) 2027 के सोमवार को शिलॉन्ग में आयोजित ‘कर्टन रेजर’ कार्यक्रम में कहा कि वैश्विक ऊर्जा उद्योग ‘‘एक महत्वपूर्ण मोड़’’ पर है। जनसंख्या वृद्धि, ऊर्जा की बढ़ती मांग, भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक वृद्धि से ऊर्जा सुरक्षा पर दबाव लगातार बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं और प्रमुख ऊर्जा गलियारों में व्यवधान का दुनियाभर में ऊर्जा आपूर्ति, कीमतों तथा अर्थव्यवस्थाओं पर तुरंत असर पड़ सकता है।’’
मजूमदार ने होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास हाल में हुए व्यवधानों का उदाहरण देते हुए कहा कि दुनिया के एक हिस्से में अस्थिरता वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए व्यापक खतरा पैदा कर सकती है।
उन्होंने भारत के समुद्र से दूर और गहरे पानी में मौजूद ऊर्जा संसाधनों की संभावनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बेहतर आंकड़ों, आधुनिक प्रौद्योगिकी, जोखिम साझा करने की व्यवस्था और बुनियादी ढांचे से इन संसाधनों का इस्तेमाल करने में मदद मिल सकती है।
राष्ट्रीय अपतटीय खोज योजना ‘समुद्र मंथन’ का जिक्र करते हुए मजूमदार ने कहा कि इस तरह की पहल भारत की खोज क्षमताओं का विस्तार करने और घरेलू ऊर्जा आपूर्ति को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
उन्होंने कहा, ‘‘इंडिया एनर्जी वीक एक प्रमुख वैश्विक मंच के रूप में उभरा है, जो नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के लोगों, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं और निवेशकों को जोड़ता है ताकि ऊर्जा क्षेत्र के लिए आगे की दिशा तय की जा सके।’’
आईईडब्ल्यू के 2026 संस्करण में 75,000 से अधिक लोगों ने भाग लिया था, जिसमें 700 प्रदर्शक कंपनियां और 120 से अधिक देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए थे। यह इस मंच के बढ़ते विस्तार को दर्शाता है।
इसका मुख्य कार्यक्रम कोलकाता में आयोजित किया गया था। शिलॉन्ग का कार्यक्रम इसी का हिस्सा था।
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