नयी दिल्ली, 11 जुलाई (भाषा) भारत ने अमेरिका के साथ व्यापार से जुड़े मुद्दों को एकतरफा कदमों के बजाय द्विपक्षीय वार्ताओं के जरिए सुलझाने पर जोर देते हुए अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) से प्रस्तावित 12.5 प्रतिशत शुल्क पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।
इसके साथ ही भारत ने कहा है कि बंधुआ मजदूरी से जुड़े मामलों पर यूएसटीआर की ‘धारा 301’ के तहत की गई जांच में कई विसंगतियां हैं।
वाणिज्य विभाग में संयुक्त सचिव बृज मोहन मिश्रा ने इस मसले पर आठ जुलाई को आयोजित सार्वजनिक सुनवाई में कहा कि भारत बंधुआ मजदूरी के उन्मूलन को संवैधानिक दायित्व और अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों के तहत गंभीरता से लेता है।
उन्होंने कहा कि यूएसटीआर की रिपोर्ट प्रासंगिक कानूनी मानकों को पूरा नहीं करती और बिना पर्याप्त साक्ष्य के किसी देश पर व्यापक शुल्क लगाना उचित नहीं है।
इस सुनवाई के बारे में यूएसटीआर की वेबसाइट पर प्रकाशित विवरण के मुताबिक, भारत ने कहा कि यूएसटीआर का यह निर्णय देशव्यापी शुल्क लगाने का कोई तार्किक कारण नहीं बताता है और यह अनुचित रूप से भारत सहित 46 अर्थव्यवस्थाओं को एक ही श्रेणी में रखता है।
यूएसटीआर की धारा 301 जांच उन देशों से संबंधित है जहां बंधुआ मजदूरी से तैयार उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगाने और उसका प्रभावी क्रियान्वयन नहीं होने की बात कही गई है।
भारत ने यह भी कहा कि जांच की पद्धति त्रुटिपूर्ण है क्योंकि यह कुछ चुनिंदा मामलों और व्यापक व्यापार रुझानों के आधार पर निष्कर्ष निकालती है, जबकि देश-विशिष्ट या क्षेत्र-विशिष्ट प्रमाण नहीं दिए गए हैं।
इसके अलावा, भारत के मामले में यह साबित नहीं किया गया है कि आयात प्रतिबंध की कमी से अमेरिकी उद्योग को नुकसान पहुंचाने वाला कोई अनुचित प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिलता है।
मिश्रा ने कहा, ‘हम यूएसटीआर से आग्रह करते हैं कि वह अपनी रिपोर्ट में सामने आई विसंगतियों को देखते हुए प्रस्तावित शुल्क पर पुनर्विचार करे। दोनों देशों के बीच व्यापार संबंधी किसी भी समस्या का समाधान भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार वार्ता के ढांचे में होना चाहिए, न कि इस तरह के एकतरफा उपायों के जरिए।’
उन्होंने कहा कि भारत किसी भी विशेष चिंता के समाधान के लिए यूएसटीआर के साथ परामर्श और संवाद जारी रखने को तैयार है।
इस बीच, कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) की ओर से पेश हुए श्रेयांश गुप्ता ने भारत में कथित तौर पर बंधुआ मजदूरी से उत्पादित चावल के आयात संबंधी टिप्पणियों का विरोध किया।
वाशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास में प्रथम सचिव गुप्ता ने कहा कि भारत का चावल आयात बहुत सीमित है और विशेष किस्मों की मांग को पूरा करने तक सीमित रहता है। साथ ही, ऐसे आयातित चावल के निर्यात पर सख्त नियामक नियंत्रण हैं।
उद्योग संगठनों फिक्की और सीआईआई ने भी प्रस्तावित शुल्क का विरोध करते हुए कहा कि इससे भारतीय निर्यातकों के साथ-साथ अमेरिकी कंपनियों और उपभोक्ताओं पर भी लागत का बोझ बढ़ेगा।
यूएसटीआर ने इस साल मार्च में धारा 301 के तहत जांच शुरू की थी। इस बारे में अंतिम निर्णय से पहले सभी पक्षों की टिप्पणियों पर विचार किया जाएगा।
भाषा योगेश प्रेम
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