पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत ने अमेरिका से एलपीजी, एलएनजी की खरीद बढ़ाई

पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत ने अमेरिका से एलपीजी, एलएनजी की खरीद बढ़ाई

पश्चिम एशिया संकट के बीच भारत ने अमेरिका से एलपीजी, एलएनजी की खरीद बढ़ाई
Modified Date: August 25, 2026 / 04:35 pm IST
Published Date: August 25, 2026 4:35 pm IST

नयी दिल्ली, 25 अगस्त (भाषा) पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण खाड़ी देशों से आपूर्ति प्रभावित होने के बीच भारत ने अमेरिका से तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की खरीद तेजी से बढ़ाई है। समुद्री सूचना कंपनी केप्लर के आंकड़ों से यह जानकारी मिली है।

केप्लर के मुताबिक, भारत ने अगस्त में अमेरिका से करीब 6.2 लाख टन एलपीजी का आयात किया है, जबकि जुलाई में यह मात्रा 8.9 लाख टन थी। अगस्त में अमेरिका से हुई आपूर्ति भारत के कुल एलपीजी आयात का 73 प्रतिशत से अधिक रही।

इसके मुकाबले खाड़ी देशों से एलपीजी आयात में तेज गिरावट आई है। अगस्त में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से भारत को करीब 1.4 लाख टन और कतर से करीब 60,000 टन एलपीजी मिली। सऊदी अरब ने जुलाई और अगस्त में भारत को कोई एलपीजी की आपूर्ति नहीं हुई।

ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध शुरू होने के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रभावी रूप से बंद होने से खाड़ी देशों से आपूर्ति प्रभावित हुई है। यह जलमार्ग खाड़ी के तेल और गैस उत्पादक देशों से भारत जैसे प्रमुख उपभोक्ताओं तक कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति का महत्वपूर्ण मार्ग है।

एलएनजी के मामले में भी भारत की अमेरिका से आपूर्ति बढ़ी है। अगस्त में अमेरिका से एलएनजी आयात बढ़कर करीब 7.5 लाख टन हो गया, जो जुलाई में 7.2 लाख टन था। वहीं, भारत के सबसे बड़े एलएनजी आपूर्तिकर्ता कतर से अप्रैल में आयात शून्य रहा। कतर इससे पहले भारत को एक महीने में 12 लाख टन तक एलएनजी की आपूर्ति करता रहा है।

केप्लर के वरिष्ठ प्रबंधक सुमित रितोलिया ने कहा, ‘‘खासकर एलपीजी के मामले में पिछले कुछ महीनों में अमेरिका की तरफ रुझान बढ़ा है। हालांकि, इसे भारत द्वारा जानबूझकर पश्चिम एशिया की आपूर्ति की जगह अमेरिकी आपूर्ति अपनाने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। इसका बड़ा कारण पश्चिम एशिया से आपूर्ति में कमी और भारतीय खरीदारों द्वारा आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाना है।’’

उन्होंने कहा कि दूर के आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता बढ़ने से भारत की आयात लागत भी बढ़ रही है। लंबी समुद्री यात्रा के कारण मालभाड़ा अधिक है और वैश्विक स्तर पर आपूर्ति सीमित होने से जिंस की लागत भी बढ़ी है।

हालांकि, कच्चे तेल के मामले में रूस अब भी भारत का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है। भारत ने अगस्त में रूस से करीब 20 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल खरीदा, जो दूसरे सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता यूएई (6.1 लाख बैरल) के मुकाबले तीन गुना से अधिक है।

रितोलिया ने कहा कि रूस से कच्चे तेल का आयात फिलहाल घटने की उम्मीद नहीं है, क्योंकि वैश्विक कच्चे तेल की आपूर्ति की स्थिति अब भी सीमित है। पश्चिम एशिया से आपूर्ति बाधित रहने की वजह से रूसी कच्चे तेल को पूरी तरह बदल पाना मुश्किल होगा।

भारत ने अगस्त में वेनेजुएला से भी 3.83 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल आयात किया।

केप्लर के मुताबिक, अमेरिका और वेनेजुएला को मिलाकर देखें तो अमेरिकी महाद्वीप भारत के कच्चे तेल के स्रोतों में अधिक महत्वपूर्ण हो रहा है।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय


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