एआई क्षेत्र में तेजी से एशिया-प्रशांत क्षेत्र की वृद्धि को सहारा: मूडीज एनालिटिक्स

एआई क्षेत्र में तेजी से एशिया-प्रशांत क्षेत्र की वृद्धि को सहारा: मूडीज एनालिटिक्स

एआई क्षेत्र में तेजी से एशिया-प्रशांत क्षेत्र की वृद्धि को सहारा: मूडीज एनालिटिक्स
Modified Date: August 25, 2026 / 03:21 pm IST
Published Date: August 25, 2026 3:21 pm IST

नयी दिल्ली, 25 अगस्त (भाषा) कृत्रिम मेधा (एआई) के क्षेत्र में आई तेजी ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र को अपेक्षाकृत बड़ी आर्थिक नरमी से बचने में मदद की है, लेकिन वैश्विक तनाव और व्यापार झटकों के कारण कीमतें ऊंची बनी रहने से आर्थिक वृद्धि के लिए चुनौतियां बढ़ रही हैं। आर्थिक शोध और जोखिम प्रबंधन कंपनी मूडीज एनालिटिक्स ने मंगलवार को रिपोर्ट में यह बात कही है।

रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि 2026 में घटकर 4.2 प्रतिशत और 2027 में 3.6 प्रतिशत रह जाएगी। 2025 में यह 4.3 प्रतिशत थी।

पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण वैश्विक उथल-पुथल और अमेरिका तथा उसके व्यापारिक साझेदारों के बीच तनाव के कारण व्यापार बाधित होने से कीमत और कारोबार की लागत बढ़ी है। इससे क्षेत्र के कई हिस्सों में उपभोक्ताओं और कंपनियों के खर्च में कमी आई है।

मूडीज एनालिटिक्स ने अपनी एशिया-प्रशांत परिदृश्य रिपोर्ट में कहा, ‘‘फिलहाल एआई क्षेत्र में आई तेजी निर्यात वृद्धि को सहारा दे रही है, लेकिन अब इसके रुकने की आशंका बढ़ रही है।’’

रिपोर्ट के अनुसार, एआई क्षेत्र में जारी तेजी फिलहाल ऊंची महंगाई और सख्त आर्थिक नीतियों से पैदा हो रहे दबाव से कुछ राहत दे रही है। साथ ही, पश्चिम एशिया में संघर्ष आर्थिक वृद्धि के लिए सबसे बड़ी चिंताओं में से एक है और इससे वृद्धि को नुकसान पहुंचने का जोखिम है।

मूडीज एनालिटिक्स ने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष के फिर बढ़ने और होर्मुज जलडमरूमध्य की लंबे समय तक नाकेबंदी होने से कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आ सकता है और देशों को अपने तेल भंडार का इस्तेमाल करना पड़ सकता है। इससे महंगाई बढ़ेगी, आर्थिक वृद्धि प्रभावित होगी और केंद्रीय बैंकों के सामने नीतिगत चुनौतियां और बढ़ जाएंगी।

रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘पश्चिम एशिया में लंबे समय तक चलने वाला संघर्ष, एआई क्षेत्र में तेजी का अचानक खत्म होना, नए व्यापार तनाव या वैश्विक नरमी के बीच वित्तीय बाजारों में गिरावट से क्षेत्र की अर्थव्यवस्थाएं बुरी तरह प्रभावित हो सकती हैं।’’

भाषा रमण अजय

अजय


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