रूस-यूरोपीय संघ सीबीएएम विवाद में भारत ने तीसरे पक्ष के अधिकार सुरक्षित रखे

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रूस-यूरोपीय संघ सीबीएएम विवाद में भारत ने तीसरे पक्ष के अधिकार सुरक्षित रखे

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  • Publish Date - September 25, 2026 / 09:51 PM IST,
    Updated On - September 25, 2026 / 09:51 PM IST

नयी दिल्ली, 25 सितंबर (भाषा) भारत ने रूस और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच ‘कार्बन सीमा समायोजन व्यवस्था’ (सीबीएएम) को लेकर विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में चल रहे विवाद में तीसरे पक्ष के अधिकार सुरक्षित रखे हैं। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

अधिकारी ने कहा कि डब्ल्यूटीओ के विवाद निपटान निकाय ने यूरोपीय संघ के सीबीएएम प्रावधान के खिलाफ रूस की शिकायत पर मामले की सुनवाई के लिए पैनल गठित करने पर सहमति जताई है।

जिनेवा स्थित अधिकारी ने कहा कि भारत के अलावा अर्जेंटीना, ब्राजील, कनाडा, चीन, चीनी ताइपे, इंडोनेशिया, जापान, सऊदी अरब, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, नॉर्वे, पराग्वे, सिंगापुर, स्विट्जरलैंड, थाईलैंड, ब्रिटेन और अमेरिका ने भी इस विवाद में तीसरे पक्ष के अधिकार सुरक्षित रखे हैं।

रूस ने यूरोपीय संघ के सीबीएएम पैकेज और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन भत्तों के कारोबार से जुड़ी योजना के तहत कथित निर्यात सब्सिडी को लेकर वाद दायर किया हुआ है।

एक अन्य अधिकारी ने कहा कि मामले में तीसरे पक्ष के रूप में शामिल होने से भारत को विवाद की कार्यवाही पर नजर रखने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि भारत इस मामले में ईयू और रूस, दोनों के रुख को देख सकेगा।

अधिकारी ने कहा कि तीसरे पक्ष का दर्जा भारत को रूस द्वारा उठाए गए डब्ल्यूटीओ से जुड़े मुद्दों पर अपने विचार रखने की अनुमति देगा, लेकिन वह विवाद का मुख्य पक्ष नहीं होगा।

यह मामला भारत के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि ईयू की सीबीएएम व्यवस्था के तहत इस्पात और एल्युमीनियम जैसे कार्बन-गहन उत्पादों के निर्यातकों पर कार्बन लागत और कार्बन कर से जुड़ी अतिरिक्त अनुपालन शर्तें लागू होती हैं।

भाषा प्रेम

प्रेम रमण

रमण