मुंबई, 25 सितंबर (भाषा) वैश्विक स्तर पर जोखिम धारणा में सुधार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के संभावित हस्तक्षेप के बीच शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 24 पैसे की बढ़त के साथ 95.75 पर बंद हुआ।
विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने बताया कि स्थानीय आयातकों की डॉलर मांग, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त रुख ने रुपये की बढ़त को सीमित किया।
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.92 पर खुला। कारोबार के दौरान रुपया फिसलकर 95.94 के निचले स्तर तक आ गया, लेकिन बाद में इसने वापसी की और पिछले बंद भाव के मुकाबले 24 पैसे की बढ़त के साथ 95.75 पर बंद हुआ।
रुपया बृहस्पतिवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 26 पैसे टूटकर 95.99 पर बंद हुआ था।
मिराए एसेट शेयरखान के शोध विश्लेषक अनुज चौधरी ने कहा, ”होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के लिए अमेरिका-ईरान के बीच प्रस्तावित चरणबद्ध समझौते को लेकर बनी सकारात्मक उम्मीद तथा वैश्विक जोखिम धारणा में सुधार से रुपये में बढ़त का रुख बने रहने की उम्मीद है।”
उन्होंने कहा, ”कच्चे तेल की गिरती कीमतें और कमजोर डॉलर निचले स्तरों पर रुपये को समर्थन दे सकते हैं। हालांकि, किसी भी नए तनाव से ऊंचे स्तरों पर रुपये पर दबाव आ सकता है। ”
चौधरी के अनुसार हाजिर बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 95.60 से 96.10 के दायरे में रह सकता है।
इस बीच, छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.18 प्रतिशत फिसलकर 101.10 पर था।
वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा 1.08 प्रतिशत की गिरावट के साथ 105.45 डॉलर प्रति बैरल पर रहा।
कारोबारियों ने कहा कि रुपये के कमजोर होकर 96 के करीब जाने पर रिजर्व बैंक हस्तक्षेप कर सकता है।
बंबई शेयर बाजार का सूचकांक 315.20 अंक सुधरकर 73,895.74 पर और निफ्टी 77.40 अंक सुधरकर 23,140.50 पर बंद हुआ।
शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशक (एफआईआई) बाजार में शुद्ध बिकवाल रहे। उन्होंने शुक्रवार को शुद्ध रूप से 3,693.93 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
भाषा राजेश राजेश रमण
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