भारत-ब्रिटेन एफटीए का मुख्य लक्ष्य परिवर्तनकारी वृद्धि: गोयल

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भारत-ब्रिटेन एफटीए का मुख्य लक्ष्य परिवर्तनकारी वृद्धि: गोयल

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  • Publish Date - June 26, 2026 / 07:29 PM IST,
    Updated On - June 26, 2026 / 07:29 PM IST

(तस्वीरों के साथ)

(अदिति खन्ना)

लंदन, 26 जून (भाषा) केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को कहा कि भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) का प्रमुख लक्ष्य दोनों देशों के बीच परिवर्तनकारी आर्थिक वृद्धि होना चाहिए।

गोयल भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौते (सीईटीए) के 15 जुलाई से लागू होने से पहले दोनों देशों की तैयारियों की समीक्षा के लिए तीन दिवसीय ब्रिटेन दौरे पर हैं।

लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग की ओर से आयोजित एक संवाद कार्यक्रम में उन्होंने भारतीय उद्योग परिसंघ (फिक्की) के नेतृत्व वाले कारोबारी प्रतिनिधिमंडल से सीईटीए के तहत उन्नत विनिर्माण, उपभोक्ता वस्तुओं, नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य सेवा और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में उपलब्ध अवसरों पर चर्चा की।

गोयल ने कहा, ‘मेरे विचार से भारतीय और ब्रिटेन की कंपनियों के लिए सहयोग, साझेदारी और संयुक्त प्रयास तेजी से आगे बढ़ने का सबसे प्रभावी तरीका होगा। इससे कारोबार का विस्तार तेज हो सकेगा।’

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार सामान्य तौर पर चार से छह प्रतिशत की दर से बढ़ता है, लेकिन भारत को इससे कहीं अधिक महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखने होंगे।

गोयल ने कहा कि यदि भारत केवल इतनी ही वृद्धि को लक्ष्य बनाएगा तो यह दुनिया के भारत पर बढ़ते भरोसे के साथ न्याय नहीं होगा।

मंत्री ने बताया कि सीईटीए के साथ ही अगले महीने लागू होने वाला दोहरा योगदान समझौता (डीसीसी) दोनों देशों में पांच वर्ष तक के अस्थायी कार्यकाल पर काम करने वाले कर्मचारियों पर लागू होगा।

गोयल ने कहा कि सीईटीए केवल शुल्क और मूल नियमों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह लगभग 48 अरब पाउंड के द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को नई ऊंचाई देने का व्यापक अवसर है।

उन्होंने कहा कि कारोबारी समुदाय को नए क्षेत्रों में प्रवेश और परिवर्तनकारी वृद्धि को प्राथमिकता देनी चाहिए।

कार्यक्रम में गोयल ने कई रिपोर्ट जारी कीं, जिनमें भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) की ‘इंडियन रूट्स, ब्रिटिश सॉयल’ रिपोर्ट शामिल है। इसमें पिछले एक दशक में ब्रिटेन में भारतीय निवेश की यात्रा का विवरण दिया गया है।

इसके अलावा, यूके इंडिया बिजनेस काउंसिल (यूकेआईबीसी) की सीईटीए कार्यान्वयन पुस्तिका, रेटिंग एजेंसी केयरएज की रिपोर्ट और फिक्की की भारत-ब्रिटेन आर्थिक साझेदारी पर आधारित रिपोर्ट भी जारी की गई।

गोयल ने कहा, ‘अब तक हमारे पास केवल फिच, मूडीज और स्टैंडर्ड एंड पुअर्स जैसी रेटिंग एजेंसियां थीं। मैं यह रिकॉर्ड पर कह सकता हूं कि उन्होंने भारत के साथ निष्पक्ष व्यवहार नहीं किया। उन्होंने भारत की वृद्धि गाथा, मजबूत आर्थिक बुनियाद, उसकी क्षमता और भविष्य का उतना सही आकलन नहीं किया, जितना किसी रेटिंग एजेंसी को करना चाहिए। मैं उनके इरादों पर कोई सवाल नहीं उठा रहा हूं, लेकिन यह बात मुझे निश्चित रूप से हैरान करती है।’

गोयल ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि ‘केयरएज’ ने अपना काम पूरी तरह से निष्पक्ष होकर किया है। उसने भारत की तुलना में बेहद कमजोर और भविष्य की कम संभावनाओं वाली अर्थव्यवस्थाओं का आकलन किया है, जिन्हें अन्य रेटिंग एजेंसियों ने न जाने किन कारणों से भारत से बेहतर रेटिंग दे रखी है।’’

भारत में पर्यटन की अपार संभावनाओं पर चर्चा के दौरान मंत्री ने अधिक विदेशी पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए निर्यात संवर्धन के दृष्टिकोण से सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) परियोजनाओं में सरकार की ओर से वित्तीय सहयोग देने की पेशकश की।

गोयल ने कहा, ‘हमें विदेशी पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के लिए गंभीरता से काम करने की जरूरत है। साथ ही यह भी देखना होगा कि उच्च खर्च करने वाले पर्यटकों को भारत कैसे आकर्षित किया जाए। वैश्विक कंपनियों के निदेशक मंडल की बैठकें भारत में आयोजित कराकर उन्हें देश में हो रहे बदलाव और विकास से रूबरू कराया जा सकता है।’’

मंत्री ने लघु एवं मझोले उद्यमों (एसएमई) से भी व्यापार प्रतिनिधिमंडलों में उत्साहपूर्वक भाग लेने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि भारतीय कारोबारियों के लिए दुनिया भर में ऐसे 500 व्यापार प्रतिनिधिमंडल भेजने की योजना है।

इससे पहले गोयल ने कहा कि उन्होंने ब्रिटेन के व्यापार एवं वाणिज्य मंत्री पीटर काइल के साथ सार्थक चर्चा की, जिसमें दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक सहयोग को और गहरा करने के नए अवसरों पर विचार किया गया।

गोयल ने कहा, ‘इस बातचीत में वह गर्मजोशी, भरोसा और दूरदर्शी दृष्टिकोण झलकता है, जो हमारे द्विपक्षीय संबंधों की पहचान बने हुए हैं। हम ऐसे परिवेश को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जो नवाचार, निवेश और दोनों देशों की समग्र वृद्धि को प्रोत्साहित करे।’

भाषा योगेश रमण

रमण