भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता: मूल स्रोत घोषणा के स्व-प्रमाणन को लागू करने के लिए दिशानिर्देश जारी

भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता: मूल स्रोत घोषणा के स्व-प्रमाणन को लागू करने के लिए दिशानिर्देश जारी

भारत-ब्रिटेन व्यापार समझौता: मूल स्रोत घोषणा के स्व-प्रमाणन को लागू करने के लिए दिशानिर्देश जारी
Modified Date: July 13, 2026 / 07:56 pm IST
Published Date: July 13, 2026 7:56 pm IST

नयी दिल्ली, 13 जुलाई (भाषा) केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) ने सोमवार को भारत-ब्रिटेन व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौते के तहत उत्पाद के मूल स्रोत को लेकर घोषणा की स्व-प्रमाणन व्यवस्था लागू करने के लिए दिशानिर्देश जारी किए। यह समझौता 15 जुलाई से लागू होगा।

भागीदार देशों के साथ भारत के व्यापार समझौते के तहत शुल्क लाभ पाने के लिए निर्यात को ‘उत्पत्ति स्रोत का प्रमाणपत्र’ एक जरूरी दस्तावेज है।

यह सुनिश्चित करने के लिए कि तीसरे देशों के उत्पाद दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते के तहत मिलने वाले विशेष शुल्क लाभ का गलत तरीके से फायदा न उठा सकें, सामान के मूल स्रोत का पता लगाना जरूरी है।

सीबीआईसी के एक परिपत्र में कहा गया, ‘‘चूंकि यह समझौता उत्पादन के मूल स्रोत के प्रमाणपत्र की पारंपरिक प्रणाली की जगह स्व-घोषणा रूपरेखा अपनाता है, इसलिए इसमें भारत और ब्रिटेन के सीमा शुल्क अधिकारियों द्वारा लागू की जाने वाली सत्यापन प्रक्रिया की व्यवस्था है।’’

इसके अनुसार, परिपत्र में कहा गया है कि भारत में आयात के लिए जानकारी के आदान-प्रदान और मूल स्रोत घोषणापत्र के सत्यापन के लिए जरूरी उपाय किए गए हैं।

परिपत्र में कहा गया है कि घोषणापत्र की वास्तविकता साबित होने के बाद ही विशेष शुल्क का दावा किया जा सकता है।

इसमें कहा गया है कि मूल स्रोत घोषणापत्र उसके पूरा होने की तारीख से 12 महीनों तक वैध रहेगा।

परिपत्र के अनुसार, ‘‘ मूल स्रोत घोषणापत्र एक ही खेप से जुड़ा होगा और इसे कई बार आयात के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकेगा।’’

भाषा रमण अजय

अजय


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