खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़ने से जून में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.38 प्रतिशत पर

खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़ने से जून में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.38 प्रतिशत पर

खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़ने से जून में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.38 प्रतिशत पर
Modified Date: July 13, 2026 / 07:28 pm IST
Published Date: July 13, 2026 7:28 pm IST

नयी दिल्ली, 13 जुलाई (भाषा) खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़ने से देश में खुदरा मुद्रास्फीति जून में बढ़कर 4.38 प्रतिशत हो गई जो भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के चार प्रतिशत के निर्धारित लक्ष्य से अधिक है। मई में यह 3.93 प्रतिशत रही थी।

राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की तरफ से सोमवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, जून महीने में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) आधारित खाद्य मुद्रास्फीति बढ़कर 5.32 प्रतिशत हो गई, जबकि मई में यह 4.78 प्रतिशत थी।

नए आधार वर्ष 2024 वाली शृंखला के तहत खुदरा मुद्रास्फीति पहली बार चार प्रतिशत के स्तर के पार गई है।

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, जून में सबसे अधिक महंगाई चांदी, सोना, हीरा एवं प्लैटिनम के आभूषण, अदरक, टमाटर और किशमिश एवं मुनक्का की कीमतों में दर्ज की गई।

दूसरी तरफ, आलू, मटर, कार एवं जीप, जीरा तथा मोटरसाइकिल एवं स्कूटर जैसी वस्तुओं में अपेक्षाकृत कम महंगाई रही।

पिछले महीने राष्ट्रीय स्तर पर मुद्रास्फीति 4.38 प्रतिशत रही जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह 4.74 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 3.92 प्रतिशत रही।

एनएसओ के आंकड़े से पता चलता है कि राज्यों में तेलंगाना में सबसे अधिक 6.36 प्रतिशत और मिजोरम में सबसे कम 1.63 प्रतिशत महंगाई दर्ज की गई।

सरकार ने आरबीआई को खुदरा मुद्रास्फीति को चार प्रतिशत पर बनाए रखने का लक्ष्य दिया हुआ है, जिसमें दो प्रतिशत की घट-बढ़ संभव है।

केंद्रीय बैंक ने जून में हुई पिछली मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया था, लेकिन 2026-27 के लिए मुद्रास्फीति अनुमान को बढ़ाकर 5.1 प्रतिशत कर दिया था।

मुद्रास्फीति के इन आंकड़ों पर इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च की निदेशक मेघा अरोड़ा ने कहा कि जुलाई में मुख्य महंगाई दर और भी बढ़कर 4.9 प्रतिशत तक जा सकती है। हालांकि, यह आरबीआई की ऊपरी संतोषजनक सीमा छह प्रतिशत के भीतर ही रहेगी।

उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में तनाव और अल नीनो जैसी प्रतिकूल जलवायु परिस्थितियां महंगाई के लिए जोखिम बनी हुई हैं।

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की वरिष्ठ निदेशक एवं प्रमुख अर्थशास्त्री दीप्ति देशपांडे ने अपनी टिप्पणी में कहा कि जनवरी, 2025 के बाद पहली बार खुदरा मुद्रास्फीति चार प्रतिशत के ऊपर गई है।

उन्होंने खाद्य एवं गैर-खाद्य दोनों घटकों के कारण मुद्रास्फीति बढ़ी है और आने वाले महीनों में यह और बढ़ सकती है। उन्होंने चालू वित्त वर्ष के लिए औसत मुद्रास्फीति 5.1 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया।

इक्रा रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि पेट्रोल एवं डीजल की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी का असर जून के आंकड़ों में दिखा है। उन्होंने मौद्रिक नीति समिति की अगस्त बैठक में नीतिगत दरों में स्थिरता की संभावना जताते हुए कहा कि कच्चे तेल की कीमतें, मानसून और वैश्विक हालात आगे की दिशा तय करेंगे।

एनएसओ मुद्रास्फीति की गणना के लिए देशभर के 1,407 शहरी बाजारों और 1,465 गांवों से कीमत संबंधी आंकड़े एकत्र करता है।

भाषा प्रेम प्रेम अजय

अजय


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