नयी दिल्ली, 11 जून (भाषा) कृत्रिम मेधा (एआई) के कारण नौकरियों पर मंडराते खतरे की आशंकाओं के बीच माइक्रोसॉफ्ट इंडिया के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा है कि यह प्रौद्योगिकी व्यवधान पैदा करने के बजाय कहीं अधिक नए अवसर सृजित करने की क्षमता रखती है।
उन्होंने भारतीय इंजीनियरों को सलाह दी कि वे नौकरी जाने के डर को पीछे छोड़कर इसे एक सहयोगी प्रौद्योगिकी के रूप में देखें।
माइक्रोसॉफ्ट इंडिया डेवलपमेंट सेंटर (आईडीसी) के प्रबंध निदेशक और अध्यक्ष राजीव कुमार ने बृहस्पतिवार को एक ब्लॉग पोस्ट में कहा कि प्रौद्योगिकी का तेजी से हो रहा विकास अब तकनीकी कौशल के जीवनकाल को छोटा कर रहा है। ऐसे में कार्यबल के लिए निरंतर सीखते रहना और खुद को परिस्थितियों के अनुकूल ढालना बेहद जरूरी हो गया है।
विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की ‘फ्यूचर ऑफ जॉब्स रिपोर्ट 2025’ का हवाला देते हुए कुमार ने रेखांकित किया कि साल 2030 तक भारत में लगभग 63 प्रतिशत कार्यबल को बड़े पैमाने पर कौशल बढ़ाने और नया कौशल सीखने की आवश्यकता होगी।
उन्होंने युवाओं और युवा इंजीनियरों से अपील की कि वे एआई युग में नौकरी की सुरक्षा की चिंता से आगे बढ़ें और खुद के भीतर लगातार नया सीखने की कला की क्षमता विकसित करें। यही क्षमता उन्हें भविष्य की बदली हुई भूमिकाओं को अपनाने में मदद करेगी।
ऐतिहासिक उदाहरणों का जिक्र करते हुए कुमार ने कहा, ‘इतिहास गवाह है कि प्रौद्योगिकी की लगभग हर बड़ी लहर ने अंततः जितने अवसर खत्म किए, उससे कहीं अधिक नए अवसर पैदा किए हैं। आज असली सवाल यह नहीं है कि भविष्य में नौकरियां होंगी या नहीं, बल्कि सवाल यह है कि हम उन नई भूमिकाओं को संभालने के लिए खुद को कितना तैयार पाते हैं। आने वाले समय में सफलता की एकमात्र कुंजी नए कौशल को सीखने और उनके अनुसार खुद को ढालने की क्षमता होगी।’
भाषा योगेश रमण
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