भारतीय एलएनजी पोत होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकला, 18 जून को भारत पहुंचेगा

Ads

भारतीय एलएनजी पोत होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकला, 18 जून को भारत पहुंचेगा

  •  
  • Publish Date - June 15, 2026 / 09:26 PM IST,
    Updated On - June 15, 2026 / 09:26 PM IST

नयी दिल्ली, 15 जून (भाषा) भारतीय ध्वज वाला एलएनजी जहाज ‘दिशा’ तीन महीने से अधिक समय बाद युद्ध प्रभावित होर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र से सुरक्षित बाहर निकलने वाला पहला भारतीय जहाज बन गया है।

भारतीय नौवहन निगम लिमिटेड (एससीआई) की अगुवाई वाले समूह द्वारा प्रबंधित यह जहाज 62,370 टन एलएनजी लेकर होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आगे बढ़ चुका है। यह अमेरिका-ईरान के बीच प्रारंभिक युद्धविराम समझौते के बाद इस जलडमरूमध्य से गुजरने वाले शुरुआती वाणिज्यिक जहाजों में से एक है।

पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय के निदेशक ओपेश कुमार शर्मा ने सोमवार को संवाददाताओं से कहा, “एलएनजी पोत ‘दिशा’ सुरक्षित रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुका है और यह 62,370 टन एलएनजी लेकर आ रहा है। इसके 18 जून को भारत के दहेज बंदरगाह पर पहुंचने की संभावना है।”

मंत्रालय ने कहा कि नौवहन महानिदेशालय भारतीय नाविकों की सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित करने के लिए विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावासों, पोत परिवहन कंपनियों और अन्य हितधारकों के साथ लगातार समन्वय में है।

कतर से मालढुलाई के लिए पेट्रोनेट एलएनजी द्वारा चार्टर पर लिया गया जहाज ‘दिशा’ पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान जलडमरूमध्य में फंस गया था। लेकिन इसने भारत के लिए अपनी यात्रा फिर से शुरू की है।

शर्मा ने कहा कि अब तक 10 भारतीय और पांच विदेशी जहाजों समेत कुल 15 पोत इस रणनीतिक जलमार्ग को सुरक्षित पार कर चुके हैं और एलएनजी पोत के भारत पहुंचने वाला अगला जहाज होने की संभावना है।

उन्होंने महीने की शुरुआत में एक टैंकर से जुड़ी घटना पर टिप्पणी करते हुए जहाज की पहचान ‘बोकेम मारेंगो’ के रूप में की, जो हांगकांग के ध्वज वाला तेल एवं रसायन टैंकर है।

शर्मा ने कहा, “जहाज पर सवार सभी भारतीय सुरक्षित हैं। चालक दल के किसी सदस्य को कोई चोट नहीं आई है और न ही कोई अन्य अप्रिय घटना हुई है।”

उन्होंने बताया कि मंत्रालय संकट में फंसे भारतीय नाविकों के मामलों को भी संभाल रहा है और जरूरत पड़ने पर स्थानीय एजेंट की नियुक्ति सहित सहायता तंत्र सक्रिय किया गया है।

एक मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एक जहाज 14 जून को तट पर पहुंचा, जहां एक मृत नाविक के पार्थिव शरीर को भारत भेजने के लिए पहले ओमान ले जाया गया।

शर्मा ने कहा कि व्यापक खाड़ी क्षेत्र में फिलहाल करीब 18,000 भारतीय नाविक कार्यरत हैं। नाविकों और उनके परिवारों के लिए 24 घंटे की हेल्पलाइन संचालित है, जबकि अब तक 3,500 से अधिक नाविकों को सुरक्षित स्वदेश लाया जा चुका है।

मंत्रालय के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में संचालित भारतीय ध्वज वाले जहाजों पर करीब 325 भारतीय नाविक तैनात हैं, जबकि इस क्षेत्र में फिलहाल 13 भारतीय जहाज मौजूद हैं।

मंत्रालय के मुताबिक, स्थापित नियंत्रण कक्ष ने पिछले 96 घंटों में 12,737 कॉल और 28,299 से अधिक ईमेल का निपटान किया है। इस दौरान नाविकों, उनके परिवारों और अन्य समुद्री हितधारकों से 406 कॉल और 784 ईमेल प्राप्त हुए।

शर्मा ने कहा कि मंत्रालय विदेश मंत्रालय सहित सभी संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय में स्थिति पर करीबी निगाह रखे हुए है और हालात में बदलाव के अनुसार आगे भी जानकारी साझा करता रहेगा।

भाषा प्रेम

प्रेम अजय

अजय