विदेशी एयरलाइन कंपनियों में नहीं जाएं भारतीय पायलट, संगठन की कर राहत की मांग
विदेशी एयरलाइन कंपनियों में नहीं जाएं भारतीय पायलट, संगठन की कर राहत की मांग
मुंबई, 30 सितंबर (भाषा) भारतीय पायलट विदेशी एयरलाइन कंपनियों का रुख कर रहे हैं। ऐसे में एक पायलट संगठन ‘एयरलाइन पायलट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया’ (एएलपीए इंडिया) ने वित्त वर्ष 2027-28 के बजट में पायलट के लिए लक्षित कर राहत उपायों की मांग की है। संगठन ने नागर विमानन मंत्रालय से इन प्रस्तावों को वित्त मंत्रालय के समक्ष उठाने का आग्रह किया है।
अंतरराष्ट्रीय पायलट संगठन ‘इंटरनेशनल फेडरेशन ऑफ एयरलाइन पायलट्स एसोसिएशन’ (आईएफएएलपीए) से संबद्ध एएलपीए इंडिया ने 28 सितंबर को नागर विमानन सचिव समीर कुमार सिन्हा को लिखे पत्र में कहा कि किसी पायलट के विदेशी एयलाइन में जाने की एकमात्र वजह कुल वेतन नहीं है, बल्कि कर के कारण हाथ में आने वाली कमाई में पैदा हुआ अंतर भी है। संगठन के अनुसार, खाड़ी देशों जैसे शून्य आयकर वाले क्षेत्रों में जाने वाले पायलट की वास्तविक आय में काफी वृद्धि हो जाती है।
एएलपीए इंडिया के अनुसार, इन राहत उपायों में परिवहन भत्ते पर कर छूट की सीमा को मौजूदा 10,000 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 30,000 रुपये प्रति माह करने, ड्यूटी पूरी कर लौटने वाले विमान चालक दल के लिए सीमा शुल्क मुक्त भत्ते को मौजूदा 2,500 रुपये प्रति यात्रा से बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रति यात्रा करने की मांग शामिल हैं।
संगठन ने वित्त विधेयक में पायलट के परिवहन और पोशाक भत्ते के लिए विशेष छूट का प्रावधान करने का भी सुझाव दिया है, क्योंकि मौजूदा बजट में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। उसने लाइसेंस प्राप्त पायलट के लिए मानक कटौती को मौजूदा के 75,000 रुपये से दोगुना करने का प्रस्ताव रखा है।
एएलपीए इंडिया ने गैर-वेतनभोगी, अनुबंध और चार्टर पायलट के लिए अनुकूल कराधान व्यवस्था लागू करने का भी सुझाव दिया है। इसके लिए उसने अगले वित्त वर्ष के बजट में वाणिज्यिक पायलट को निर्दिष्ट पेशे के रूप में अधिसूचित करने की मांग की है।
भाषा यासिर अजय
अजय

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