भारत का ‘बिहाइंड-द-मीटर’ स्थिर ऊर्जा भंडारण बाजार 2033 तक 39 गीगावाट-घंटे से अधिक होगा: आईईएसए

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भारत का ‘बिहाइंड-द-मीटर’ स्थिर ऊर्जा भंडारण बाजार 2033 तक 39 गीगावाट-घंटे से अधिक होगा: आईईएसए

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  • Publish Date - April 13, 2026 / 02:05 PM IST,
    Updated On - April 13, 2026 / 02:05 PM IST

नयी दिल्ली, 13 अप्रैल (भाषा) देश का ऊर्जा भंडारण क्षेत्र अगले दशक में तेजी से बढ़ने की राह पर है जिसमें ‘बिहाइंड-द-मीटर’ (बीटीएम) स्थिर भंडारण बाजार की वार्षिक मांग 2025 में 32 गीगावाट घंटे से बढ़कर 2033 तक 39 गीगावाट घंटे से अधिक होने का अनुमान है। एक रिपोर्ट में यह बात कही गई।

‘बीटीएम’ से तात्पर्य बिजली मीटर के उपभोक्ता पक्ष (घर या व्यवसाय) में स्थापित ऊर्जा उत्पादन या भंडारण प्रणालियों से है। ये प्रणालियां जैसे रूफटॉप सोलर या बैटरी, सीधे उपभोक्ता की आवश्यकताओं को पूरा करती हैं और ग्रिड के बजाय सीधे परिसर के विद्युत नेटवर्क से जुड़ी होती हैं जिससे बिजली बिल में कमी आती है और विश्वसनीयता बढ़ती है।

इंडिया एनर्जी स्टोरेज अलायंस (आईईएसए) की रिपोर्ट के अनुसार, बीटीएम तंत्र में उपभोक्ता के मीटर से परे उसके परिसर में ही स्थापित ऊर्जा उत्पादन एवं भंडारण प्रणाली शामिल होती हैं। इनमें छत पर सौर संयंत्र (रूफटॉप सोलर पैनल), बैटरी स्टोरेज, साथ ही यूपीएस, इन्वर्टर व टेलीकॉम टावर के साथ स्थापित बैकअप बैटरी प्रणाली शामिल हैं। ये प्रणाली ग्रिड से गुजरे बिना ही उत्पादित या संग्रहीत ऊर्जा के सीधे उपयोग की सुविधा देती है।

लिथियम-आयन बैटरियों और सोलर-प्लस-स्टोरेज सिस्टम की लागत लगातार घटने के कारण भारत में अधिक व्यवसाय एवं उपभोक्ता बढ़ते बिजली शुल्क को नियंत्रित करने और भरोसेमंद बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए ‘ऑन-साइट’ ऊर्जा भंडारण की ओर रुख कर रहे हैं।

भंडारण के साथ ‘रूफटॉप’ सौर प्रणाली से ऊर्जा की औसत लागत 2024 में करीब छह से सात रुपये प्रति यूनिट किलोवाट रही जो महाराष्ट्र, तमिलनाडु और कर्नाटक जैसे प्रमुख राज्यों में वाणिज्यिक ग्रिड शुल्क के करीब पहुंच गई।

आईईएसए के विश्लेषकों का अनुमान है कि 2026 तक ‘सोलर-प्लस-स्टोरेज’ प्रणाली देशभर में अधिक वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के लिए लागत के लिहाज से प्रतिस्पर्धी हो जाएगी और इसके बाद औद्योगिक उपभोक्ता भी तेजी से इसे अपनाएंगे।

आईईएसए के अध्यक्ष देबमाल्य सेन ने कहा, ‘‘ 2033 तक 39 गीगावाट-घंटा की अनुमानित वृद्धि केवल मांग में बढ़ोतरी ही नहीं बल्कि ऊर्जा के उपयोग के तरीके में एक बड़े बदलाव को दर्शाती है।’’

भाषा निहारिका अजय

अजय