भारत में रूस से कच्चे तेल का आयात अप्रैल में 15 प्रतिशत घटकर 4.5 अरब यूरो पर
भारत में रूस से कच्चे तेल का आयात अप्रैल में 15 प्रतिशत घटकर 4.5 अरब यूरो पर
नयी दिल्ली, 12 मई (भाषा) भारत का रूस से कच्चा तेल आयात अप्रैल माह में 15 प्रतिशत से अधिक घट गया जिसका मुख्य कारण एक प्रमुख रिफाइनरी का रखरखाव के लिए बंद होना रहा। एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
यूरोपीय शोध संस्थान ‘सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर’ (सीआरईए) की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने अप्रैल में रूस से 4.5 अरब यूरो मूल्य का कच्चा तेल आयात किया, जो मार्च में हुए 5.3 अरब यूरो के आयात से कम है।
अप्रैल में भारत, रूस से जीवाश्म ईंधन का दूसरा सबसे बड़ा खरीदार रहा और कुल पांच अरब यूरो के पेट्रोलियम उत्पाद आयात किए। इसमें कच्चे तेल की हिस्सेदारी 90 प्रतिशत रही, जबकि कोयला 29.7 करोड़ यूरो और तेल उत्पाद 20.9 करोड़ यूरो के रहे।
मार्च महीने के कुल 5.8 अरब यूरो के आयात में कच्चे तेल की हिस्सेदारी 91 प्रतिशत रही थी।
सीआरईए ने कहा कि अप्रैल में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में 3.7 प्रतिशत की कमी आई। इसके पीछे रूस से तेल आयात में 19.4 प्रतिशत की मासिक गिरावट प्रमुख कारण रही।
रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात की वाडिनार और जामनगर रिफाइनरियों में रूसी तेल की आवक में क्रमशः करीब 92 प्रतिशत और 38 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि इंडियन ऑयल की वाडिनार रिफाइनरी में आयात 87 प्रतिशत बढ़ गया।
नायरा एनर्जी की वाडिनार रिफाइनरी के नौ अप्रैल से रखरखाव के कारण बंद होने की वजह से आयात में गिरावट दर्ज की गई। दरअसल, यह रिफाइनरी पूरी तरह रूसी कच्चे तेल पर निर्भर है।
नया मंगलूर और विशाखापत्तनम रिफाइनरियों ने नवंबर, 2025 के बाद रूसी तेल का आयात रोक दिया था, लेकिन मार्च, 2026 से यह खरीद दोबारा शुरू हुई है। विशाखापत्तनम रिफाइनरी में रूसी तेल का आयात अप्रैल में 149 प्रतिशत बढ़ गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका द्वारा प्रतिबंधों में दी गई छूट के कारण पिछले कुछ सप्ताह में रूसी तेल के आयात में तेजी आई।
इस बीच, अप्रैल में रूस के यूराल कच्चे तेल की औसत कीमत 19 प्रतिशत बढ़कर 112.3 डॉलर प्रति बैरल हो गई, जो यूरोपीय संघ और ब्रिटेन द्वारा निर्धारित 44.1 डॉलर प्रति बैरल की सीमा से काफी अधिक है।
भाषा प्रेम
प्रेम अजय
अजय

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