चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर घटकर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान: बीएमआई
चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर घटकर 6.6 प्रतिशत रहने का अनुमान: बीएमआई
नयी दिल्ली, 11 अगस्त (भाषा) फिच समूह की कंपनी बीएमआई ने मंगलवार को अनुमान जताया कि पिछले साल के माल एवं सेवा कर (जीएसटी) सुधारों से अर्थव्यवस्था को मिली बढ़त कम होने और ऊंची महंगाई दर से परिवारों की आय प्रभावित होने के कारण चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर घटकर 6.6 प्रतिशत रह सकती है।
भारत की अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2025-26 में 7.7 प्रतिशत की दर से बढ़ी थी।
बीएमआई ने कहा कि भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था बना हुआ है, लेकिन वृद्धि को लेकर जोखिम मुख्य रूप से नकारात्मक हैं। इनमें पश्चिम एशिया में फिर से तनाव बढ़ना और कमजोर मानसून प्रमुख हैं।
बीएमआई के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की आर्थिक वृद्धि दर धीमी होकर 6.6 प्रतिशत रह सकती है, क्योंकि जीएसटी सुधारों से मिला राजकोषीय प्रोत्साहन कम होगा और महंगाई औसतन 5.4 प्रतिशत के ऊंचे स्तर पर बनी रहेगी।
बीएमआई ने एशिया-प्रशांत क्षेत्र पर अपनी रिपोर्ट में कहा, ‘‘हमारा अनुमान है कि आर्थिक वृद्धि दर वित्त वर्ष 2025-26 के 7.7 प्रतिशत से घटकर 2026-27 में 6.6 प्रतिशत रह जाएगी। इसका कारण पिछले साल किए गए माल एवं सेवा कर (जीएसटी) सुधारों का असर कम होना और ऊंची महंगाई से परिवारों की आय प्रभावित होना है।’’
पिछले साल सितंबर में लागू किए गए जीएसटी सुधारों के तहत 375 वस्तुओं पर कर की दरें घटाई गई थीं और जीएसटी की चार स्लैब की संरचना को दो स्लैब पांच प्रतिशत और 18 प्रतिशत में सीमित कर दिया गया था।
बीएमआई ने कहा कि क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि के लिए सबसे बड़ा जोखिम अमेरिका-ईरान संघर्ष बना हुआ है। संघर्ष बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि हो सकती है, जिससे वास्तविक आय और निजी खपत प्रभावित होगी।
बीएमआई ने कहा, ‘‘हमें उम्मीद है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि 2027 में 4.1 प्रतिशत पर स्थिर रहेगी, हालांकि क्षेत्र की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर धीमी होगी।’’
बीएमआई ने कहा कि उसके अनुमान में यह माना गया है कि अमेरिका और ईरान के बीच प्रारंभिक समझौता तिमाही के भीतर लागू हो जाएगा।
उसने कहा कि इसमें देरी होने पर 2026 में कच्चे तेल की औसत कीमत उसके मौजूदा अनुमान 86 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से ऊपर जा सकती है और आर्थिक वृद्धि के अनुमानों में एक और संशोधन करना पड़ सकता है।
भाषा योगेश अजय
अजय

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