(कुमार दीपांकर)
समरकंद (उजबेकिस्तान), पांच मई (भाषा) पश्चिम एशिया में तनाव के दुष्प्रभावों की वजह से चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 0.6 प्रतिशत घटकर 6.3 प्रतिशत रह सकती है, जबकि मुद्रास्फीति में भी खासी बढ़ोतरी हो सकती है। एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के मुख्य अर्थशास्त्री अल्बर्ट पार्क ने मंगलवार को यह बात कही।
पार्क ने यहां पीटीआई-भाषा के साथ बातचीत में कहा कि यह आकलन एडीबी के मॉडल-आधारित परिदृश्य पर आधारित है और अगले वित्त वर्ष में वृद्धि पर इसका नकारात्मक असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था अगले वर्ष फिर संभल सकती है।
इसके पहले अप्रैल में एडीबी ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत और अगले वित्त वर्ष के लिए 7.3 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया था। वहीं वित्त वर्ष 2026-27 में 4.5 प्रतिशत महंगाई का अनुमान लगाया गया था।
हालांकि एडीबी के नवीनतम आकलन के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में महंगाई दर 2.4 प्रतिशत बढ़कर 6.9 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
पार्क ने कहा कि भारत के आयातित तेल और गैस पर अधिक निर्भर होने से क्षेत्र के अन्य देशों की तुलना में महंगाई पर असर अधिक पड़ेगा।
एडीबी ने 29 अप्रैल को जारी विशेष सूचना में एशिया-प्रशांत क्षेत्र की 2026 की वृद्धि दर का अनुमान 5.1 प्रतिशत से घटाकर 4.7 प्रतिशत कर दिया था, जिसका कारण पश्चिम एशिया में लंबे समय तक जारी व्यवधान बताया गया।
विशेष मौसमी स्थिति ‘अल नीनो’ के प्रभाव पर पार्क ने कहा कि भारत में खराब फसल होने पर खाद्य कीमतों पर असर पड़ता है, क्योंकि वैश्विक चावल व्यापार में भारत की बड़ी हिस्सेदारी है। उर्वरकों की बढ़ती कीमतें भी उत्पादन और उपलब्धता को प्रभावित कर सकती हैं।
ऊर्जा संकट से निपटने के लिए उन्होंने नवीकरणीय ऊर्जा को तेजी से अपनाने की सलाह दी, ताकि आयात पर निर्भरता कम की जा सके। हालांकि उन्होंने यह भी आशंका जताई कि जलवायु दृष्टिकोण से भारत फिर कोयले पर निर्भरता बढ़ा सकता है।
एडीबी के मुख्य अर्थशास्त्री ने दीर्घकालिक दृष्टि से भारत की वृद्धि संभावनाओं को मजबूत बताते हुए कहा कि सुधारों की गति, घरेलू मांग और निवेश अभी भी सकारात्मक हैं।
उन्होंने कहा कि प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई में हाल की चिंता को अधिक महत्व नहीं देना चाहिए और मुक्त व्यापार समझौते (एफडीए) इस स्थिति में सुधार ला सकते हैं।
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प्रेम रमण
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