विदेशों से धन भेजे जाने में भारत 137 अरब डॉलर के साथ शीर्ष पर बरकरारः संयुक्त राष्ट्र संस्था

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विदेशों से धन भेजे जाने में भारत 137 अरब डॉलर के साथ शीर्ष पर बरकरारः संयुक्त राष्ट्र संस्था

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  • Publish Date - May 5, 2026 / 08:33 PM IST,
    Updated On - May 5, 2026 / 08:33 PM IST

(योषिता सिंह)

नयी दिल्ली, पांच मई (भाषा) भारत ने वर्ष 2024 में 137 अरब डॉलर से अधिक राशि विदेशों से धनप्रेषण के रूप में हासिल कर दुनिया में शीर्ष स्थान बरकरार रखा और वह 100 अरब डॉलर का आंकड़ा पार करने वाला एकमात्र देश रहा। संयुक्त राष्ट्र की एक संस्था ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (आईओएम) की तरफ से जारी ‘विश्व प्रवासन रिपोर्ट 2026’ के मुताबिक, भारत विदेशों से लगातार सबसे अधिक प्रेषण पाने वाला देश बना हुआ है। भारत के बाद मेक्सिको का स्थान है।

वर्ष 2024 में भारत, मेक्सिको, फिलीपीन और फ्रांस वैश्विक स्तर पर धनप्रेषण पाने के मामले में शीर्ष चार देशों में शामिल रहे।

रिपोर्ट कहती है कि भारत को 2024 में 137.67 अरब डॉलर का प्रेषण मिला, जो अन्य देशों की तुलना में काफी अधिक है। 2010 में भारत के लिए यह आंकड़ा 53.48 अरब डॉलर था, जो 2015 में 68.91 अरब डॉलर, 2020 में 83.15 अरब डॉलर और 2024 में बढ़कर 137 अरब डॉलर से अधिक हो गया।

क्षेत्रीय स्तर पर दक्षिण एशिया में 2024 के दौरान प्रेषण में 11.8 प्रतिशत की सबसे तेज वृद्धि का अनुमान है। इसमें भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश को मिले मजबूत प्रवाह की अहम भूमिका रही।

रिपोर्ट के मुताबिक, उच्च आय वाले देश इस धनप्रेषण के प्रमुख स्रोत बने हुए हैं। अमेरिका से 2024 में सर्वाधिक 100 अरब डॉलर से अधिक राशि दूसरे देशों को भेजी गई। उसके बाद सऊदी अरब (46 अरब डॉलर से अधिक), स्विट्जरलैंड (करीब 40 अरब डॉलर) और जर्मनी (लगभग 24 अरब डॉलर) का स्थान रहा।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पढ़ाई करने वाले छात्रों में एशियाई देशों की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। वर्ष 2022 में चीन के 10 लाख से अधिक छात्र विदेशों में पढ़ रहे थे, जबकि भारत विदेश में पढ़ने वाले 6.2 लाख छात्रों के साथ दूसरे स्थान पर रहा।

भारतीय प्रवासी समुदाय को देश के प्रौद्योगिकी क्षेत्र के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला बताया गया है। इसके साथ ही, रिपोर्ट ने ‘ब्रेन ड्रेन’ की चुनौती को ‘ब्रेन गेन’ में बदलने के लिए नीतिगत उपायों की जरूरत पर भी बल दिया।

भाषा प्रेम

प्रेम रमण

रमण