नयी दिल्ली, छह मई (भाषा) ऊर्जा आपूर्ति बाधाओं की वजह से चालू वित्त वर्ष में भारत की आर्थिक वृद्धि दर 7.1 प्रतिशत के पिछले अनुमान से कम होकर 6.6 प्रतिशत रह सकती है। एसएंडपी ग्लोबल और क्रिसिल ने बुधवार को एक संयुक्त रिपोर्ट में यह कहा।
इसके साथ ही दोनों रेटिंग एजेंसी ने इस रिपोर्ट में कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ का लक्ष्य हासिल करने के लिए ऊर्जा एवं खाद्य सुरक्षा से जुड़े सुधार जरूरी होंगे।
‘इंडिया फारवर्ड’ शीर्षक वाली रिपोर्ट कहती है कि भारत इस समय ऊर्जा आपूर्ति में बाधा, तेल और गैस की बढ़ती कीमतों तथा मुद्रा विनिमय दर में उतार-चढ़ाव जैसे बाहरी आर्थिक झटकों का सामना कर रहा है। ऐसी स्थिति में रणनीतिक भंडार तैयार करने के लिए व्यापक ऊर्जा भंडारण नीति बनाने की जरूरत बताई गई है।
क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री धर्मकीर्ति जोशी ने कहा, ‘पश्चिम एशिया संकट लंबा खिंचने से नए दबाव उभर रहे हैं। रुपये में कमजोरी और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी अर्थव्यवस्था पर ‘दोहरा झटका’ डाल रही है, जिससे वृद्धि पर दबाव बढ़ रहा है।’
जोशी ने कहा कि मौजूदा हालात में भारत को ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के साथ उर्वरक क्षेत्र पर भी विशेष ध्यान देना चाहिए। उन्होंने संकट जारी रहने की स्थिति में रबी फसल के लिए उर्वरकों की कमी होने का अंदेशा भी जताया। हालांकि खरीफ फसलों के लिए स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर बनी हुई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि हाल में कई देशों एवं समूहों के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का पूरा लाभ उठाने के लिए भारत को अपनी प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ाने के लिए विभिन्न सुधार करने होंगे।
पश्चिम एशिया में 28 फरवरी से शुरू हुए संघर्ष के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है, जिससे मुद्रास्फीति को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। कच्चा तेल 30 अप्रैल को 126 डॉलर प्रति बैरल के चार साल के उच्च स्तर तक पहुंच गया था लेकिन छह मई को यह घटकर 97.77 डॉलर प्रति बैरल रह गया।
जोशी ने कहा कि वैश्विक कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का असर थोक मूल्य सूचकांक पर अधिक दिखेगा, जबकि खुदरा मुद्रास्फीति पर इसका प्रभाव सीमित रहेगा। इसकी वजह यह है कि सरकार ने पेट्रोल, डीजल और घरेलू एलपीजी की कीमतों को स्थिर रखा है। हालांकि वाणिज्यिक एलपीजी के दाम बढ़ाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि अप्रैल के मुद्रास्फीति आंकड़ों में बढ़ोतरी दिखेगी लेकिन थोक मुद्रास्फीति, खुदरा मुद्रास्फीति से अधिक रह सकता है क्योंकि इसमें आयातित वस्तुओं और कच्चे माल की लागत का प्रभाव शामिल होता है।
केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 में औसत मुद्रास्फीति 4.6 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है और इसमें बढ़ोतरी के जोखिमों की ओर भी संकेत किया है।
नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, मार्च में खुदरा मुद्रास्फीति 3.4 प्रतिशत के एक साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई, जबकि थोक मुद्रास्फीति 3.88 प्रतिशत के 38 महीने के उच्च स्तर पर रही।
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