देश का टैंकर निर्यात चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में छह गुना होकर 1.36 अरब डॉलर
देश का टैंकर निर्यात चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में छह गुना होकर 1.36 अरब डॉलर
नयी दिल्ली, 18 अगस्त (भाषा) भारत का टैंकर निर्यात चालू वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में छह गुना से अधिक होकर 1.36 अरब डॉलर रहा है, जो एक साल पहले समान अवधि में 22.11 करोड़ डॉलर था। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों से यह जानकारी मिली है।
यह देश की बढ़ती जहाज निर्माण और समुद्री इंजीनियरिंग क्षमता को दर्शाता है। इस दौरान संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य रहा।
टैंकर बड़े आकार के परिवहन पोत होते हैं, जिन्हें तरल पदार्थों तथा गैस की बड़ी मात्रा में ढुलाई के लिए तैयार किया जाता है। ये वैश्विक ऊर्जा नेटवर्क एवं औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखलाओं का अहम हिस्सा हैं और कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों, रसायनों, तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) तथा ताजा पानी जैसी महत्वपूर्ण वस्तुओं का सुरक्षित परिवहन करते हैं।
आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल-जून तिमाही में निर्यात किए गए टैंकर की संख्या भी सालाना आधार पर 10 से बढ़कर 23 हो गई। इससे भारत में निर्मित टैंकर और समुद्री परिवहन परिसंपत्तियों की बढ़ती अंतरराष्ट्रीय मांग का पता चलता है।
वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, यूएई सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य रहा, जहां अप्रैल-जून 2026-27 के दौरान 90.08 करोड़ डॉलर के टैंकर का निर्यात किया गया। यूएई को टैंकर का निर्यात 10.36 करोड़ डॉलर से बढ़कर 90.08 करोड़ डॉलर हो गया, जबकि निर्यात किए गए पोतों की संख्या चार से बढ़कर सात हो गई।
दुनिया के प्रमुख समुद्री केंद्रों में से एक सिंगापुर 146.4 करोड़ डॉलर का आयात करके दूसरा सबसे बड़ा गंतव्य रहा। एक साल पहले की समान तिमाही में यह आंकड़ा 4.55 करोड़ डॉलर था। सिंगापुर को निर्यात किए गए टैंकर की संख्या दो से बढ़कर छह हो गई।
यह वैश्विक नौवहन एवं लॉजिस्टिक्स परिवेश में भारत की बढ़ती भागीदारी को दर्शाता है।
मंत्रालय ने कहा कि पश्चिम एशिया भारतीय टैंकर निर्यात के लिए प्रमुख वृद्धि वाले क्षेत्रों में बना हुआ है।
ओमान को निर्यात 2.86 करोड़ डॉलर से बढ़कर 13.16 करोड़ डॉलर हो गया।
सऊदी अरब को निर्यात पिछले साल 3.56 करोड़ डॉलर था जो इस क्षेत्र के समुद्री परिसंपत्तियों के बाजार के रूप में निरंतर महत्व को दर्शाता है।
खाड़ी देशों की भारत के टैंकर निर्यात में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रही। यह ऊर्जा और नौवहन क्षेत्रों में मजबूत मांग को दर्शाता है।
इसके अलावा, श्रीलंका को निर्यात 79 लाख डॉलर से बढ़कर 5.65 करोड़ डॉलर हो गया। मिस्र (3.93 करोड़ डॉलर), दक्षिण अफ्रीका (3.42 करोड़ डॉलर), वियतनाम (3.15 करोड़ डॉलर), इंडोनेशिया (1.22 करोड़ डॉलर) और मोजाम्बिक (77 लाख डॉलर) नए निर्यात गंतव्य बने।
एक अधिकारी ने बताया कि निर्यात गंतव्यों में विविधता से एशिया, अफ्रीका और पश्चिम एशिया में भारत निर्मित टैंकर की बढ़ती स्वीकार्यता का पता चलता है।
उन्होंने कहा, ‘‘टैंकर के निर्यात में वृद्धि उच्च मूल्य वाले जहाज निर्माण क्षेत्र में भारत की बढ़ती क्षमताओं को रेखांकित करती है।’’
यूएई, सिंगापुर और अन्य समुद्री अर्थव्यवस्थाओं से मजबूत मांग तथा भारतीय शिपयार्ड से पोतों की बढ़ती आपूर्ति वैश्विक समुद्री व्यापार एवं वाणिज्यिक नौवहन में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है।
भाषा निहारिका अजय
अजय

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