नयी दिल्ली, दो मार्च (भाषा) देश के औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि दर जनवरी में घटकर तीन महीने के निचले स्तर 4.8 प्रतिशत पर आ गई। खनन और विनिर्माण क्षेत्रों के कमजोर प्रदर्शन से वृद्धि दर में नरमी आई।
सोमवार को जारी आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी, 2026 में देश का औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (आईआईपी) 4.8 प्रतिशत रहा जो एक साल पहले की समान अवधि में 5.2 प्रतिशत की दर से बढ़ा था।
इससे पहले अक्टूबर, 2025 में वृद्धि दर 0.5 प्रतिशत रही थी, जो हाल के महीनों का सबसे निचला स्तर है। नवंबर, 2025 में आईआईपी वृद्धि 7.2 प्रतिशत दर्ज की गई थी।
इसके साथ ही, राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) ने दिसंबर, 2025 के औद्योगिक उत्पादन वृद्धि के आंकड़े को संशोधित कर आठ प्रतिशत कर दिया है। इससे पहले जनवरी, 2026 में जारी अस्थायी अनुमान में इसे 7.8 प्रतिशत बताया गया था।
एनएसओ के आंकड़ों के मुताबिक, विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि दर जनवरी माह में घटकर 4.8 प्रतिशत रह गई, जबकि पिछले वर्ष इसी महीने में यह 5.8 प्रतिशत थी।
आलोच्य अवधि में खनन क्षेत्र की वृद्धि भी मामूली घटकर 4.3 प्रतिशत रह गई। यह एक वर्ष पहले की समान अवधि में 4.4 प्रतिशत थी।
हालांकि, जनवरी, 2026 के दौरान बिजली उत्पादन सुधरकर 5.1 प्रतिशत हो गया जबकि एक वर्ष पहले इसी अवधि में यह वृद्धि 2.4 प्रतिशत थी।
इसके साथ ही, चालू वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल-जनवरी अवधि में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि चार प्रतिशत रही, जो एक साल पहले की समान अवधि में 4.2 प्रतिशत थी।
उपयोग-आधारित वर्गीकरण के मुताबिक, जनवरी, 2026 में प्राथमिक वस्तुओं में 3.1 प्रतिशत, पूंजीगत वस्तुओं में 4.3 प्रतिशत, मध्यवर्ती वस्तुओं में छह प्रतिशत, अवसंरचना/ निर्माण वस्तुओं में 13.7 प्रतिशत और टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं में 6.3 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि, उपभोक्ता गैर-टिकाऊ वस्तुओं का उत्पादन 2.7 प्रतिशत घटा।
जनवरी, 2026 में आईआईपी वृद्धि में सबसे अधिक सकारात्मक योगदान अवसंरचना एवं निर्माण वस्तुओं, मध्यवर्ती वस्तुओं और प्राथमिक वस्तुओं का रहा।
विनिर्माण क्षेत्र के 23 उद्योग समूहों में से 14 में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई। इनमें बुनियादी धातुओं का विनिर्माण (13.2 प्रतिशत), मोटर वाहन एवं ट्रेलर विनिर्माण (10.9 प्रतिशत) और अन्य गैर-धात्विक खनिज उत्पाद (9.9 प्रतिशत) प्रमुख रहे।
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प्रेम अजय
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