शिमला, 13 जनवरी (भाषा) मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने मंगलवार को कृषि विभाग को प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों का विस्तृत आंकड़ा 20 जनवरी, 2026 तक हिम परिवार पोर्टल से जोड़ने का निर्देश दिया, ताकि प्रखंड स्तर का डेटाबेस बनाया जा सके।
यहां जारी एक बयान में कहा गया कि कृषि विभाग की बैठक की अध्यक्षता करते हुए, उन्होंने कहा कि पूरे राज्य में प्राकृतिक खेती के तरीकों को बढ़ावा देने से किसानों की आय बढ़ेगी। युवाओं को गांव की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्राकृतिक खेती पर आधारित प्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव लाने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि ‘‘वह इस महीने हमीरपुर में होने वाली एक सम्मेलन में प्राकृतिक खेती से जुड़े किसानों से बातचीत करेंगे।’’
सुक्खू ने प्राकृतिक खेती से उगाए गए गेहूं, मक्का और कच्ची हल्दी से जुड़े किसानों के अलग-अलग मुद्दों की समीक्षा की। प्राकृतिक खेती से पैदा हुए गेहूं के आटे को ‘हिम चक्की आटा’, मक्के के आटे को ‘हिम भोग मक्की आटा’ और कच्ची हल्दी को ‘हिम हल्दी’ ब्रांड के नाम से बेचा जा रहा है।
उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि इन उत्पादों की उपयोग करने की अंतिम तिथि और उनमें मौजूद पोषक आटे के पैकेट पर साफ-साफ लिखा होना चाहिए और पोषक तत्वों की मात्रा का पता लगाने के लिए एक खास ‘यूनिट’ बनाने का भी निर्देश दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक तरीके से उपजाए गए 606.8 टन मक्के की खरीद की गयी है और 2.31 करोड़ रुपये सीधे किसानों के बैंक खाते में भेज दिये गए हैं।
इसी तरह, 2,123 क्विंटल प्राकृतिक तरीके से उगा गेहूं खरीदा गया है और 1.32 लाख रुपये प्रत्यक्ष नकदी अंतरण (डीबीटी) के जरिए किसानों को भेज दिये गए हैं।
उन्होंने कहा कि प्राकृतिक तरीके से उगाई गई कच्ची हल्दी के लिए 90 रुपये प्रति किग्रा का समर्थन मूल्य देने के अच्छे नतीजे देखने को मिल रहे हैं और इस साल 1,629 किसानों से करीब 2,422 क्विंटल हल्दी खरीदने का अनुमान है।
भाषा राजेश राजेश रमण
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