अपर्याप्त जानकारी, पूरी तरह गलत: जीडीपी आंकड़ों पर विवाद में विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशक मिश्रा
अपर्याप्त जानकारी, पूरी तरह गलत: जीडीपी आंकड़ों पर विवाद में विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशक मिश्रा
(सागर कुलकर्णी)
वॉशिंगटन, तीन सितंबर (भाषा) विश्व बैंक के कार्यकारी निदेशक नीलकंठ मिश्रा ने उन दावों को ‘‘अपर्याप्त जानकारी’’ और “पूरी तरह गलत” करार दिया जिनमें चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत के बजाय केवल 2.6 प्रतिशत रहने का दावा किया गया है।
मिश्रा का यह बयान ऐसे समय आया है जब सरकार द्वारा जारी वृद्धि के आंकड़ों को लेकर राजनीतिक विवाद चल रहा है। पूर्व वित्त सचिव एस. सी. गर्ग ने इन आंकड़ों पर सवाल उठाए हैं।
मिश्रा ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, “…मैं यह देखकर हैरान था कि कुछ लोगों ने पर्याप्त समझ के बिना और पूरी तरह गलत दावे किए कि अगर अप्रैल-जून 2025 तिमाही के ‘मूल’ आधार का इस्तेमाल किया जाता, तो अप्रैल-जून 2026 तिमाही में वृद्धि बहुत कम होती।”
गर्ग ने दावा किया था कि पिछले साल मौजूदा कीमतों पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) 86 लाख करोड़ रुपये थी, जिसे संशोधित कर 80 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया। अगर ऐसा नहीं किया गया होता तो जीडीपी वृद्धि केवल 2.6 प्रतिशत होती।
मिश्रा ने कहा, “उम्मीद के मुताबिक, राजकोषीय दबाव कम होने और मौद्रिक क्षेत्र में दबाव (वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही तक ऋण वृद्धि में गिरावट) के अनुकूल स्थिति (ऋण वृद्धि में तेजी) में बदलने के साथ जीडीपी वृद्धि उम्मीद से बेहतर रही है। इससे वृद्धि के आम अनुमान बढ़कर सात प्रतिशत से अधिक हो जाने चाहिए। यानी, राजकोषीय और मौद्रिक नीति के तटस्थ रहने पर भी अर्थव्यवस्था 7.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज कर सकती है।”
उन्होंने कहा कि फरवरी 2026 में पेश की गई नई श्रृंखला में आंकड़ों को दुरुस्त किया गया और पद्धति में भी महत्वपूर्ण सुधार किया गया।
मिश्रा ने कहा, “जो लोग पेशेवर तौर पर इस पर नजर रखते हैं (और 45 दिन पहले तक मैं भी उनमें से एक था), उनके लिए आधार में नीचे की ओर किया गया संशोधन मार्च में ही ज्ञात था… नई श्रृंखला से वास्तविक उत्पादन के अनुमानों की विश्वसनीयता बढ़ी है।”
उन्होंने कहा, “यह दावा इतना स्पष्ट रूप से गलत है कि इसके खिलाफ कई तार्किक जवाब पहले ही दिए जा चुके हैं। गलत सूचना सही सूचना की तुलना में ज्यादा तेजी से फैलती है और इसलिए इस तर्क को दोहराना और मजबूत करना महत्वपूर्ण है।”
मिश्रा हाल तक एक्सिस बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री थे।
उन्होंने कहा, “यह अपने आप में हैरान करने वाली बात है कि ऐसे दावों को समर्थन मिला जबकि आर्थिक गतिविधियों के ऐसे संकेतक, जिन पर आसानी से नजर रखी जा सकती है और जिनमें हेरफेर की कोई गुंजाइश नहीं है, इतने मजबूत रहे हैं।”
हालांकि, उन्होंने गर्ग का नाम नहीं लिया।
मिश्रा ने कहा कि अप्रैल-जून तिमाही के आंकड़े मजबूत रहे हैं और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आई है।
उन्होंने कहा कि अगस्त में निजी वाहनों (कार और एसयूवी) की आपूर्ति सालाना आधार पर 35 प्रतिशत बढ़ी, जबकि निर्यात में केवल नौ प्रतिशत की वृद्धि हुई।
मिश्रा ने कहा कि अर्थव्यवस्था में अभी भी कुछ सुस्ती है, जो वास्तविक मजदूरी की कमजोर वृद्धि से दिखाई देती है। इसे दूर करने और मुद्रास्फीति के लगातार बने रहने वाले दबाव को फिर से बढ़ने से रोकने के लिए अर्थव्यवस्था को कई तिमाहियों तक सामान्य से अधिक तेज वृद्धि दर्ज करनी पड़ सकती है।
भाषा निहारिका मनीषा
मनीषा

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