कोलकाता, 25 फरवरी (भाषा) बीमा उद्योग को अपनी लाभप्रदता बढ़ाने और उत्पादों को अधिक किफायती बनाने के लिए ग्राहक जोड़ने की लागत एवं प्रबंधन व्यय पर नियंत्रण करना होगा। बीमा नियामक इरडा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बुधवार को यह बात कही।
भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) के सदस्य (गैर-जीवन) दीपक सूद ने उद्योग मंडल भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के एक कार्यक्रम में कहा कि ऊंची वितरण एवं प्रशासनिक लागत ने बीमा क्षेत्र को ‘कम पैठ, अधिक लागत’ के चक्र में फंसा दिया है, जिससे कवरेज का विस्तार सीमित हो रहा है।
उन्होंने कहा, “ग्राहक जोड़ने की ऊंची लागत और प्रबंधन व्यय पर सभी कंपनियों को तत्काल ध्यान देना होगा। लाभप्रदता सुधारने और ग्राहकों को किफायती एवं मूल्य आधारित उत्पाद देने के लिए यह जरूरी है।”
सूद ने बीमा कंपनियों से आग्रह किया कि वे विभिन्न उत्पादों, वितरण चैनलों और कारोबार की श्रेणियों में ग्राहकों को मिलने वाले वास्तविक मूल्य का आकलन करें।
उन्होंने बीमा उद्योग को ‘मिसिंग मिडिल’ वर्ग के लिए स्वास्थ्य बीमा को किफायती बनाने पर प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि वंचित मध्यम वर्ग के कई लोग पर्याप्त स्वास्थ्य कवर हासिल करने में कठिनाई का सामना करते हैं।
‘मिसिंग मिडिल’ वर्ग ऐसे मध्यम आय वाले परिवार होते हैं जो न तो संपन्न हैं और न ही उन्हें सरकारी योजनाओं का लाभ मिल पाता है।
उन्होंने गलत तरीके से बीमा उत्पाद बेचने की प्रवृत्ति को लेकर चेतावनी देते हुए कहा कि इससे ग्राहकों का भरोसा कमजोर हुआ है।
भाषा प्रेम प्रेम अजय
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