नयी दिल्ली, एक मार्च (भाषा) पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और युद्ध के हालातों के बीच भारतीय व्यापार पर इसके प्रभाव का आकलन करने के लिए वाणिज्य मंत्रालय ने सोमवार को एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इस बैठक में निर्यातकों, शिपिंग कंपनियों और विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।
वाणिज्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि तेजी से बदलते हालात के बीच भारतीय व्यापार पर इसके असर को समझने के लिए आयोजित इस बैठक में कुछ लोग सीधे और कुछ वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये शामिल होंगे।
निर्यातकों ने गहरी चिंता व्यक्त की है कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध से होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य जैसे महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्ग प्रभावित होंगे। ये मार्ग भारत को खाड़ी क्षेत्र, उत्तरी अमेरिका और यूरोप से जोड़ने के लिए जीवन रेखा माने जाते हैं।
भारतीय निर्यातक संगठनों के महासंघ (फियो) के अध्यक्ष एस सी रल्हन ने कहा कि इस संघर्ष ने वैश्विक लॉजिस्टिक चैनलों को बाधित करना शुरू कर दिया है। हवाई मार्ग बदले जा रहे हैं और लाल सागर तथा खाड़ी के प्रमुख मार्गों पर अनिश्चितता बढ़ गई है।
रल्हन ने चेतावनी दी कि यदि जहाजों को अफ्रीका के रास्ते से मोड़ना पड़ा, तो यूरोप और अमेरिका जाने वाले माल की पारगमन अवधि में 15 से 20 दिनों की बढ़ोतरी हो सकती है।
इस व्यवधान के कारण माल ढुलाई दरों और बीमा प्रीमियम में भारी उछाल आने की आशंका है। निर्यातकों का कहना है कि शिपिंग क्षमता की उपलब्धता, नए रूट और संशोधित दरों पर स्थिति स्पष्ट होने में कुछ दिन लग सकते हैं।
भाषा पाण्डेय
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