Supreme Court Committee on Sand Mining/Image Credit: IBC24.in
Supreme Court Committee on Sand Mining: मुरैना: चंबल नदी में अवैध रेत उत्खनन को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट सख्त हो गया है। कोर्ट की मॉनिटरिंग कमेटी ने मुरैना के राजघाट पहुंचकर जमीनी हकीकत का जायजा लिया। इसके अलावा तीन राज्यों के अधिकारी भी मौके पर मौजूद रहे। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद सेंट्रल एम्पॉवर्ड कमेटी (CEC) की टीम जमीन पर उतरी है। राजघाट के उन दुर्गम इलाकों में टीम ने नाव के जरिए 20 किलोमीटर का सफर तय किया जहां रेत माफिया बेखौफ होकर इससे पूर्व अवैध उत्खनन कर रहे थे। चंबल नदी में वन्य जीवों के संरक्षण के लिए रेत उत्खनन पर पूर्ण प्रतिबंध है, (Supreme Court Committee on Sand Mining) लेकिन हकीकत इसके उलट है,बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध खनन की शिकायत जब सुप्रीम कोर्ट पहुंची तो कोर्ट ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश की सरकारों को जमकर फटकार लगाई।
इसी कड़ी में CEC सदस्य चंद्र प्रकाश गोयल के नेतृत्व में पांच सदस्यीय दल मुरैना के राजघाट पहुंचा। ये वो इलाका है जो घड़ियालों के लिए ब्रीडिंग ग्राउंड माना जाता है। निरीक्षण के दौरान घड़ियालों के उन संवेदनशील क्षेत्रों का भी जायजा लिया गया, जहां मादा घड़ियाल अंडे देती हैं। माफियाओं द्वारा किए गए गहरे गड्ढों को देखकर टीम ने गहरी चिंता जताई है। इस दौरान तीन राज्यों यूपी,एमपी और राजस्थान के कलेक्टर,एसपी और वन विभाग के आला अधिकारी मौके पर मुस्तैद रहे।
वन विभाग के डीएफओ हरिश्चंद्र बघेल का कहना है कि, सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर यह विशेष निरीक्षण किया गया है। हमने रेत उत्खनन रोकने के लिए अतिरिक्त संसाधनों और बल की मांग रखी है। इस निरीक्षण की गोपनीय रिपोर्ट सीधे माननीय सुप्रीम कोर्ट को सौंपी जाएगी। 16 नई पोस्ट और 3 चौकियां बनाने का प्रस्ताव सरकार को भेजा है। 240 अतिरिक्त जवानों की मांग और सबसे बड़ी बात माफियाओं के गोलियों का जवाब देने के लिए वनकर्मियों को आधुनिक हथियार दिलाने पर चर्चा, निरीक्षण के दौरान टीम ने नदी किनारे बड़े-बड़े गड्ढे देखे जो अवैध खनन की हकीकत बयां कर रहे थे। (Supreme Court Committee on Sand Mining) साथ ही घड़ियालों के संवेदनशील क्षेत्रों का भी जायजा लिया गया जहां अवैध गतिविधियां सबसे बड़ा खतरा बनी हुई हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान,मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकारों को अवैध रेत उत्खनन पर फटकार लगाई थी और सख्त रोक लगाने के निर्देश दिए थे,अब इस निरीक्षण की रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट में पेश की जाएगी।
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