एआई से पीछे लौटना संभव नहीं, नियमन एवं लागत तय करेंगे अपनाने की रफ्तार : टीमलीज एडटेक सीईओ

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एआई से पीछे लौटना संभव नहीं, नियमन एवं लागत तय करेंगे अपनाने की रफ्तार : टीमलीज एडटेक सीईओ

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  • Publish Date - September 14, 2026 / 11:44 AM IST,
    Updated On - September 14, 2026 / 11:44 AM IST

नयी दिल्ली, 14 सितंबर (भाषा) टीमलीज एडटेक के संस्थापक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) शांतनु रूज ने कहा कि दुनिया में एआई आधारित बदलाव की मौजूदा प्रक्रिया अब अपरिवर्तनीय है, लेकिन नियमन एवं इसके इस्तेमाल की लागत अंततः यह तय करेगी कि एआई कारोबार और रोजमर्रा की जिंदगी में कितनी तेजी तथा गहराई से पैठ बनाता है।

उन्होंने कहा कि कृत्रिम मेधा (एआई) का इस्तेमाल मुख्यधारा में आने के साथ केवल एआई कौशल होना अब किसी व्यक्ति को दूसरों के मुकाबले बढ़त नहीं देगा। इसके बजाय, अपने क्षेत्र की जानकारी, बाजार एवं ग्राहकों की समझ रखने वाले तथा एआई का इस्तेमाल कर कारोबारी फायदा बढ़ाने की क्षमता रखने वाले लोगों को फायदा मिलेगा।

रूज ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘…क्षेत्र विशेष के कौशल, विश्लेषणात्मक कौशल रखने वाले और बदलाव की प्रक्रिया से जुड़े पेशेवर जो कार्यप्रवाह, उद्योगों और अक्षमताओं को समझ सकते हैं तथा राजस्व बढ़ाने, लागत घटाने या ग्राहकों की भागीदारी बेहतर करने के लिए एआई का इस्तेमाल कर सकते हैं..उन्हें संभवतः काफी तरजीह मिलेगी।’’

उन्होंने एआई के कारण हो रहे बदलाव की तुलना ‘‘जलवायु परिवर्तन’’ से की और कहा कि इसे ‘‘हल्की-फुल्की बारिश’’ नहीं समझा जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, ‘‘एआई की वजह से हमारे आसपास जो कुछ हो रहा है, मेरी नजर में वह हल्की-फुल्की बारिश नहीं, बल्कि (जलवायु परिवर्तन जैसा) है। इस बदलाव के बाद दुनिया कभी भी एआई से पहले के दौर में वापस नहीं जाएगी…लागत और नियमन दो महत्वपूर्ण कारक हैं, जो यह तय करेंगे कि एआई हमारे रोजमर्रा के जीवन में कितनी तेजी और गहराई से आकार लेगा।’’

एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई ने अत्याधुनिक एआई की क्षमताओं में प्रगति की रफ्तार धीमी करने की अपील की है, ताकि सुरक्षा उपायों को उसके साथ कदम मिलाने का समय मिल सके। उन्होंने स्वतंत्र मूल्यांकनकर्ताओं, प्रमुख एआई कंपनियों के बीच समन्वय और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का प्रस्ताव दिया है।

वहीं सैम ऑल्टमैन ने सप्ताहांत में की गई टिप्पणियों में कथित तौर पर कहा कि ओपनएआई 2026 में सार्वजनिक कंपनी नहीं बनेगी। इससे एआई से जुड़े सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर ध्यान गया है, जिनमें एआई के कारण मानव जाति के विलुप्त होने का 10 प्रतिशत जोखिम वाला परिदृश्य ‘‘अस्वीकार्य’’ माना गया है।

गौरतलब है कि एआई एजेंट के नियंत्रण से बाहर होकर बाहरी प्रणालियों को हैक करने और इंसानों के निर्देशों को न मानने के मामले सामने आए हैं। इसके अलावा, एआई सुरक्षा शोधकर्ताओं के नौकरी छोड़ने और प्रौद्योगिकी से जुड़े जोखिमों पर सोशल मीडिया में अपनी गंभीर चिंताएं जाहिर करने से भी दुनियाभर में चिंता बढ़ी है।

भाषा निहारिका

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