Sanjay Nishad statement: ‘पैसों पर बिकने वाली कौम नहीं है मछुआरा समाज’, UP में चुनावी सरगर्मी के बीच संजय निषाद का हमला, बोले- ‘पैसों से नहीं बिकेगा समाज’

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Sanjay Nishad statement: ‘पैसों पर बिकने वाली कौम नहीं है मछुआरा समाज’, UP में चुनावी सरगर्मी के बीच संजय निषाद का हमला, बोले- ‘पैसों से नहीं बिकेगा समाज’

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  • Publish Date - September 14, 2026 / 12:51 PM IST,
    Updated On - September 14, 2026 / 12:52 PM IST

Sanjay Nishad statement | Photo Credit: IBC24

HIGHLIGHTS
  • डॉ. संजय निषाद ने का मौसमी नेताओं पर निशाना
  • वोटों की दलाली करने वालों को पहचानने की अपील
  • जातिगत भेद से बचने की सलाह

लखनऊ: Sanjay Nishad statement कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय निषाद (Sanjay Nishad) ने विधानसभा चुनाव की बढ़ती सरगर्मी के बीच मछुआरा समाज को मौसमी नेताओं से सावधान रहने की नसीहत दी है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि आजादी के बाद पहली बार उत्तर प्रदेश में मछुआरा समुदाय एक बड़ी राजनीतिक ताकत बनकर खड़ा हुआ है। ऐसे समय में समाज के वोटों की दलाली करने वालों को पहचानने की जरूरत है।

Sanjay Nishad statement डॉ. संजय निषाद ने बिना किसी का नाम लिए निशाना साधते हुए कहा कि कुछ मौसमी नेता अब तक यह तय नहीं कर पाए हैं कि उन्हें मुंबई में व्यापार करना है, यहां-वहां घूमकर दूसरों की दरी बिछानी है या मछुआरा समाज के वोटों की दलाली करनी है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में मछुआरा समुदाय के वोटों की खरीद-बिक्री के लिए बदनाम और वहां समाज के राजनीतिक उभार को नुकसान पहुंचाने वाले लोग अब उत्तर प्रदेश में निषाद समाज को गुमराह करने निकले हैं।

उन्होंने कहा कि जो खुद एक विधानसभा चुनाव जीतने की हैसियत नहीं रखता, वह जेब में नोटों की गड्डी लेकर लाल टोपी और नीली वर्दी पहनकर यूपी के निषाद समाज को राजनीति सिखाने चला है। मछुआरा समुदाय पैसों पर बिकने वाली कौम नहीं है। उत्तर प्रदेश के मछुआरों को राजनीति सिखाने से पहले यह समझ लेना चाहिए कि राजनीति और संघर्ष उनके खून में है।

डॉ. निषाद ने कहा कि मछुआरा समाज ने मुगलों और अंग्रेजों से संघर्ष किया और देश की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संविधान में समाज को अधिकार और आरक्षण मिला, लेकिन आपसी बिखराव के कारण उसका हक लुटता रहा। आज भी केवट, मल्लाह, बिंद और कश्यप के नाम पर भेद पैदा कर समाज को एकजुट होने से रोकने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने कहा कि दूसरे दलों से पैसा लेकर समाज के बीच बांटने और उसके वोटों का सौदा करने वालों को समाज पहचान ले। मछुआरा गरीब जरूर है, लेकिन अपने स्वाभिमान और अधिकारों का सौदा करने वाला नहीं है। उन्होंने पोस्ट के अंत में ‘जय निषादराज’ लिखा।

इन्हें भी पढ़ें:-

डॉ. संजय निषाद ने किसे निशाना बनाया?

मौसमी नेताओं और वोटों की दलाली करने वालों को।

उन्होंने मछुआरा समाज के बारे में क्या कहा?

समाज पैसों पर बिकने वाला नहीं है, राजनीति और संघर्ष उनके खून में है।

बिहार का जिक्र क्यों किया गया?

वहां वोटों की खरीद-बिक्री के आरोप लगाकर समाज को नुकसान पहुंचाने की बात कही।