जियो प्लेटफॉर्म्स ने 37,700 करोड़ रुपये के आईपीओ के लिए दाखिल किए दस्तावेज
जियो प्लेटफॉर्म्स ने 37,700 करोड़ रुपये के आईपीओ के लिए दाखिल किए दस्तावेज
नयी दिल्ली, 19 जून (भाषा) रिलायंस इंडस्ट्रीज की डिजिटल सेवा इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स लिमिटेड ने शुक्रवार को करीब 37,700 करोड़ रुपये के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के लिए बाजार नियामक सेबी के समक्ष मसौदा दस्तावेज दाखिल किए।
यह देश का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ बन सकता है। कंपनी का लक्ष्य आईपीओ के जरिए करीब चार अरब डॉलर (करीब 37,700 करोड़ रुपये) जुटाने का है।
मसौदा दस्तावेज के मुताबिक, जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ के लिए 27 करोड़ तक नए शेयर जारी करेगी, जो निर्गम के बाद कुल इक्विटी का लगभग 2.9 प्रतिशत होगा।
दस्तावेज में कहा गया है, ‘आईपीओ से होनी वाली शुद्ध आय का उपयोग मुख्य रूप से इसकी प्रमुख अनुषंगी रिलायंस जियो इन्फोकॉम लिमिटेड (आरजेआईएल) द्वारा लिए गए कुछ बकाया कर्जों के पूर्ण या आंशिक पूर्व-भुगतान और सामान्य कंपनी उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।’
सूत्रों ने कहा कि जियो प्लेटफॉर्म्स इस निर्गम के जरिए करीब 37,700 करोड़ रुपये जुटाने की उम्मीद कर रही है, जिससे यह देश का सबसे बड़ा आईपीओ बन जाएगा।
जुटाए जाने वाले इस अनुमानित कोष के आधार पर जियो प्लेटफॉर्म्स का मूल्यांकन लगभग 137 अरब डॉलर आंका जा रहा है।
सूत्रों ने बताया कि आईपीओ से मिलने वाली राशि में से करीब 27,500 करोड़ रुपये का उपयोग कर्ज चुकाने या पूर्व-भुगतान और सामान्य कंपनी उद्देश्यों के लिए किया जाएगा।
जियो प्लेटफॉर्म्स ने पहले भी वैश्विक प्रौद्योगिकी एवं निजी इक्विटी निवेशकों से बड़ी रकम जुटाई है। वर्ष 2020 में कंपनी ने फेसबुक की मूल कंपनी मेटा से 9.99 प्रतिशत हिस्सेदारी के बदले 43,574 करोड़ रुपये और गूगल से 7.73 प्रतिशत हिस्सेदारी के बदले 33,737 करोड़ रुपये जुटाए थे।
इसके अलावा, कंपनी ने सिल्वर लेक, विस्टा इक्विटी पार्टनर्स, जनरल अटलांटिक, केकेआर, मुबाडाला, एडीआईए, टीपीजी, एल कैटरटन, पीआईएफ, इंटेल कैपिटल और क्वालकॉम वेंचर्स जैसे वैश्विक निवेशकों के समूह से करीब 15.2 प्रतिशत हिस्सेदारी के बदले लगभग 74,745 करोड़ रुपये जुटाए थे।
वर्तमान में रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास जियो प्लेटफॉर्म्स में 66.43 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि मेटा के पास 9.99 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
यह आईपीओ वर्ष 2008 के बाद रिलायंस समूह का पहला सार्वजनिक निर्गम होगा और समूह के भीतर किसी उपभोक्ता-केंद्रित कंपनी का पहला आईपीओ भी होगा।
भाषा प्रेम
प्रेम रमण
रमण

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