तिरुवनंतपुरम, सात जून (भाषा) केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने कहा कि केरल में भारत के समुद्री प्रवेश द्वार के रूप में उभरने और नीली अर्थव्यवस्था में उपलब्ध अपार संभावनाओं का लाभ उठाने की क्षमता है।
सतीशन ने कहा कि समुद्री अर्थव्यवस्था आर्थिक वृद्धि, रोजगार सृजन और समुद्री संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखते हुए समुद्री और तटीय संसाधनों के सतत उपयोग को बढ़ावा देती है।
मुख्यमंत्री ने विश्व महासागर दिवस (आठ जून) की पूर्व संध्या पर जनसंपर्क विभाग की ओर से जारी एक लेख में कहा कि राज्य की रणनीतिक तटीय स्थिति, बंदरगाह और समुद्री ढांचा भविष्य की आर्थिक वृद्धि के प्रमुख आधार हैं।
सतीशन ने कहा कि केरल की 600 किलोमीटर लंबी तटरेखा, दो अंतरराष्ट्रीय बंदरगाह, एक कंटेनर टर्मिनल, 17 छोटे बंदरगाह, मछली पकड़ने के बंदरगाह, अंतर्देशीय जलमार्ग और पर्यटन संपत्तियां मिलकर एक मजबूत समुद्री अर्थव्यवस्था की नींव रखती हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की विकास रणनीति इन संसाधनों को एकीकृत कर केरल को बंदरगाह-आधारित अर्थव्यवस्था के रूप में विकसित करने की परिकल्पना पर आधारित है, जिसमें माल परिवहन के लिए समुद्री मार्गों का अधिक उपयोग और आपूर्ति शृंखला, क्रूज पर्यटन, मत्स्य पालन, जलीय कृषि और समुद्री सेवाओं में अवसरों का विस्तार शामिल है।
उन्होंने कहा, ‘‘सरकार का लक्ष्य इन संसाधनों को एकीकृत कर राज्य को एक प्रमुख बंदरगाह-आधारित अर्थव्यवस्था बनाना है, जिसमें वर्तमान में सड़क मार्ग से होने वाले कम से कम 50 प्रतिशत माल परिवहन को धीरे-धीरे समुद्री मार्गों पर स्थानांतरित किया जाएगा।’’
सतीशन ने कहा कि विकास का दूसरा चरण क्रूज पर्यटन पर केंद्रित होगा, जबकि तीसरे चरण में राज्य की नदी प्रणाली से जुड़ी पर्यटन परियोजनाओं पर ध्यान दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि केरल को बंदरगाह-आधारित अर्थव्यवस्था में बदलने से रोजगार के लाखों अवसर पैदा हो सकते हैं।
सतीशन ने कहा कि दुबई की अर्थव्यवस्था का लगभग 28 प्रतिशत हिस्सा उसके बंदरगाह क्षेत्र से आता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि केरल की तटरेखा और समुद्री संसाधनों में आर्थिक विकास के अपार अवसर मौजूद हैं।
भाषा यासिर पारुल
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