माल में विविधता का अभाव,भौगोलिक पहचान का लाभ न उठा पाने से चाय निर्यात मंदा : विशेषज्ञ

माल में विविधता का अभाव,भौगोलिक पहचान का लाभ न उठा पाने से चाय निर्यात मंदा : विशेषज्ञ

माल में विविधता का अभाव,भौगोलिक पहचान का लाभ न उठा पाने से चाय निर्यात मंदा : विशेषज्ञ
Modified Date: November 29, 2022 / 08:46 pm IST
Published Date: June 13, 2021 5:28 pm IST

(चौथे पैरा में सुधार के साथ रिपीट)

कोलकाता 13 जून (भाषा) चाय व्यापारियों और बागान मालिकों का मानना है कि उत्पाद में विविधता की कमी और विशिष्ट भौगोलिक पहचान (जीआई टैग) का फायदा न उठा पाने की नाकामी जैसे कारणों से भारतीय चाय निर्यात में सुस्ती आयी है।

उनका कहना है कि श्रीलंका विपणन का ठोस प्रयास कर भारत से आगे निकल रहा है।

भारतीय चाय निर्यातक संघ के अध्यक्ष अंशुमान कनोरिया ने पीटीआई-भाषा से कहा,” हमने दार्जिलिंग चाय की विशिष्ट भौगोलिक पहचान का इस्तेमाल कानूनी लड़ाई और खरीदारों को धमकाने में किया है, जबकि समय की मांग यह है कि कोलम्बियाई कॉफी की तर्ज पर अच्छा-खासा वित्तपोषण कर भारतीय चाय को प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए।’

उन्होंने कहा कि भारतीय सीटीसी चाय अफ़्रीकी चाय के मुकाबले महंगी है और इस वजह से निर्यात बाजार में भारत को छह करोड़ किलो का नुकसान हो सकता है।

भारतीय चाय संघ (आईटीए) के सचिव सुजीत पात्रा ने कहा कि निर्यात बाजार में भौगोलिक पहचान के नियम लागू कराना जरूरी है, लेकिन उतना ही जरूरी उन बाजारों में भारतीय चाय के लोगो का पंजीकरण कराया जाना और उसका प्रचार करना भी है।

उन्होंने पीटीआई-भाषा से कहा, ‘उदाहरण के तौर पर एक वर्ष में 85 लाख किलोग्राम दार्जिलिंग चाय का उत्पादन होता है जिसे ‘चायों की शैंपेन’ कहा जाता है लेकिन वैश्विक स्तर पर दार्जिलिंग चाय के नाम से पांच करोड़ किलोग्राम चाय की बिक्री हो गयी। यह विशिष्ट भौगोलिक पहचान के नियम का उल्लंघन है। नियमों को सही तरह से लागू किया जाना चाहिए और विदेशों में प्रामाणिक दार्जिलिंग चाय की जांच के लिए एक तंत्र की जरूरत है।’

दार्जिलिंग टी एसोसिएशन के प्रमुख सलाहकार संदीप मुखर्जी ने कहा कि नेपाल की चाय भी घरेलू और अंतराष्ट्रीय बाजारों में दार्जिलिंग चाय के नाम से बेची जा रही है।

भाषा प्रणव दिलीप

दिलीप


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