नयी दिल्ली, 12 मई (भाषा) मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी. अनंत नागेश्वरन ने मंगलवार को कहा कि बड़े उद्योगों को सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) को समय पर भुगतान सुनिश्चित करना चाहिए, ताकि उनकी कार्यशील पूंजी की जरूरतें पूरी हों और पूंजी की लागत कम हो सके।
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के वार्षिक व्यापार सम्मेलन में नागेश्वरन ने कहा कि बड़े उद्योगों को एमएसएमई द्वारा प्रस्तुत बिल को स्वीकार कर समय पर भुगतान करना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘ देश के बड़े उद्यमों को एमएसएमई की कार्यशील पूंजी आवश्यकताओं को कम करने में योगदान देने का संकल्प लेना चाहिए। एमएसएमई बड़े उद्यमों के लिए कार्यशील पूंजी का स्रोत नहीं होने चाहिए बल्कि इसके विपरित होना चाहिए। इन उद्यमों की पूंजी लागत अपेक्षाकृत अधिक होती है।’’
नागेश्वरन ने कहा कि एमएसएमई के लिए कार्यशील पूंजी उपलब्ध होने से नवाचार के लिहाज से ‘‘सकारात्मक परिवेश’’ बनेगा। भारत में बड़ी संख्या में एमएसएमई हैं जिनमें से कई विस्तार करने और वैश्विक मूल्य श्रृंखला में बेहतर तरीके से जुड़ने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार ने एमएसएमई के विकास के लिए अनुकूल परिवेश बनाने के प्रयास किए हैं। विभिन्न विभागों के नीति-निर्माताओं को एमएसएमई के लिए नियमों को सरल, पारदर्शी एवं भरोसेमंद बनाना चाहिए।
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