नवीकरणीय ऊर्जा संबंधों को बढ़ाने के लिए बनाए गए मंच का लाभ उठाना जरूरी: ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त

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नवीकरणीय ऊर्जा संबंधों को बढ़ाने के लिए बनाए गए मंच का लाभ उठाना जरूरी: ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त

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  • Publish Date - March 22, 2026 / 01:23 PM IST,
    Updated On - March 22, 2026 / 01:23 PM IST

नयी दिल्ली, 22 मार्च (भाषा) ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच नवीकरणीय ऊर्जा साझेदारी के अगले चरण में जलवायु परिवर्तन क्षेत्र के दिग्गजों द्वारा तैयार किए गए मजबूत मंच का उपयोग करना जरूरी है। भारत में ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन ने यह बात कही। इसमें दोनों देशों के पूरक कौशल का लाभ उठाना शामिल है।

उन्होंने ‘पीटीआई वीडियो’ को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा साझेदारी (आरईपी) का अगला चरण उन व्यावसायिक विकल्पों के बारे में है, जो जलवायु अभियान के तहत ऑस्ट्रेलिया और भारत के बीच मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि ऑस्ट्रेलियाई नवाचार और भारतीय स्तर – यानी विनिर्माण, परिनियोजन और वैश्विक पहुंच के बीच एक वास्तविक तालमेल है।

गौरतलब है कि वर्ष 2024 में भारत और ऑस्ट्रेलिया ने आधिकारिक तौर पर नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में द्विपक्षीय निवेश को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आरईपी की शुरुआत की थी।

दोनों देशों के बीच स्वच्छ ऊर्जा सहयोग पर जोर देते हुए ऑस्ट्रेलियाई राजनयिक ने कहा कि गुजरात में ऑस्ट्रेलिया-भारत रूफटॉप सौर प्रशिक्षण अकादमी दो हजार से अधिक युवाओं को प्रशिक्षित करेगी, जिसमें महिलाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम का मकसद न केवल छत पर सौर परियोजनाएं स्थापित करने के लिए आवश्यक कौशल प्रदान करना है, बल्कि ग्रिड में बिजली की स्थिर वापसी सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उन्नत तकनीकें सिखाना भी है।

ग्रीन ने भारत को अधिक प्रभावी और सस्ते सौर पैनल बनाने में मदद करने में ऑस्ट्रेलिया की रुचि पर भी जोर दिया। उन्होंने बताया, ”यह साझेदारी भारत के तेजी से बढ़ते नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र के जमीनी स्तर के संचालन में ऑस्ट्रेलियाई तकनीकी विशेषज्ञता को जोड़ने की दिशा में एक रणनीतिक बदलाव है।”

भाषा अजय पाण्डेय

अजय