एलपीजी उत्पादन, सीएनजी, पाइप वाली रसोई गैस को आवंटन में मिली शीर्ष प्राथमिकता

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एलपीजी उत्पादन, सीएनजी, पाइप वाली रसोई गैस को आवंटन में मिली शीर्ष प्राथमिकता

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  • Publish Date - March 10, 2026 / 01:43 PM IST,
    Updated On - March 10, 2026 / 01:43 PM IST

नयी दिल्ली, 10 मार्च (भाषा) पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण आयातित गैस आपूर्ति बाधित होने के बीच केंद्र सरकार ने घरेलू स्तर पर उत्पादित प्राकृतिक गैस के आवंटन की प्राथमिकता सूची संशोधित कर दी है। नई व्यवस्था में एलपीजी उत्पादन को सीएनजी और पाइप से मिलने वाली रसोई गैस के साथ शीर्ष प्राथमिकता दी गई है।

सरकार की तरफ से जारी गजट अधिसूचना के मुताबिक, इन क्षेत्रों की जरूरतें पहले पूरी की जाएंगी और उसके बाद ही अन्य क्षेत्रों को गैस उपलब्ध कराई जाएगी।

संशोधित व्यवस्था के तहत पाइप के जरिये घरेलू रसोई गैस (पीएनजी), वाहनों के लिए संपीडित प्राकृतिक गैस (सीएनजी) और एलपीजी उत्पादन को प्राथमिकता श्रेणी में सबसे ऊपर रखा गया है। इन क्षेत्रों को पिछले छह महीने की औसत खपत के आधार पर 100 प्रतिशत गैस आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।

उर्वरक क्षेत्र को दूसरी प्राथमिकता दी गई है और उसकी पिछले छह महीने की औसत मांग का कम-से-कम 70 प्रतिशत पूरा किया जाएगा।

इस सूची में तीसरे स्थान पर चाय उद्योग, विनिर्माण और अन्य औद्योगिक उपभोक्ताओं को रखा गया है। इन्हें परिचालन उपलब्धता के आधार पर पिछले छह महीने की औसत गैस खपत का लगभग 80 प्रतिशत उपलब्ध कराया जाएगा।

शहरी गैस वितरण (सीजीडी) से जुड़ी कंपनियों द्वारा औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को की जाने वाली आपूर्ति को प्राथमिकता सूची में चौथे स्थान पर रखा गया है।

भारत में घरेलू गैस उत्पादन लगभग 19.1 करोड़ मानक घन मीटर प्रतिदिन की कुल खपत का करीब आधा हिस्सा ही पूरा कर पाता है। ऐसे में पश्चिम एशिया संकट के कारण गैस आपूर्ति बाधित होने से प्राथमिकता तय करने का फैसला किया गया है।

सरकार ने कहा कि प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को आपूर्ति बनाए रखने के लिए पेट्रोकेमिकल संयंत्रों, बिजली इकाइयों और ऊंची कीमत पर गैस खरीदने वाले उपभोक्ताओं को मिलने वाली गैस में कटौती की जा सकती है।

ईरान पर अमेरिका एवं इजराइल के संयुक्त हमले और फिर ईरान के जवाबी कार्रवाई से पूरे इलाके में तनाव बढ़ गया है। इसके कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले समुद्री यातायात में कमी आई है और ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बढ़ी है। वैश्विक समुद्री तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की लगभग एक-तिहाई आपूर्ति इसी रास्ते से होती है।

सरकार ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिये एलएनजी आपूर्ति बाधित होने के कारण आपूर्तिकर्ताओं ने ‘फोर्स मेज्योर’ प्रावधान लागू कर दिया है। यह प्रावधान किसी असाधारण या अनियंत्रित परिस्थिति के कारण अनुबंध की शर्तें पूरी न कर पाने पर लागू होता है।

ऐसे में प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को गैस उपलब्ध कराने के लिए घरेलू गैस आपूर्ति को नए सिरे से व्यवस्थित किया गया है।

अधिसूचना के मुताबिक, पाइपलाइन संचालन के लिए जरूरी कंप्रेसर ईंधन एवं अन्य उत्पादों को भी प्राथमिकता श्रेणी में रखा गया है, क्योंकि इनके बिना गैस पाइपलाइन का संचालन हो पाना संभव नहीं है।

सरकार ने कहा कि इस व्यवस्था का उद्देश्य प्राथमिक क्षेत्रों के लिए गैस आपूर्ति बनाए रखना और उपलब्ध संसाधनों का संतुलित वितरण सुनिश्चित करना है।

अधिसूचना के मुताबिक, सरकारी स्वामित्व वाली गैस कंपनी गेल इंडिया लिमिटेड को प्राथमिकता पर आधारित इस व्यवस्था को लागू करने के लिए प्राकृतिक गैस आपूर्ति प्रबंधन की जिम्मेदारी दी गई है।

भाषा प्रेम

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