bangladesh petrol supply/ image source: IBC24
Bangladesh Oil Crisis: नई दिल्ली: वैश्विक ऊर्जा संकट और मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच Bangladesh में ईंधन की भारी कमी का संकट गहरा गया है। खासतौर पर Strait of Hormuz के आसपास बढ़े तनाव और क्षेत्रीय संघर्षों के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसका असर सीधे बांग्लादेश के ईंधन बाजार पर पड़ा है। देश में पेट्रोल और डीजल की किल्लत के चलते कई पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग रही हैं और लोगों में पैनिक बाइंग देखने को मिल रही है।
स्थिति को संभालने के लिए सरकार ने ईंधन की बिक्री पर दैनिक सीमा भी तय कर दी है, लेकिन इसके बावजूद बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। इसी बीच संकट को कम करने के लिए India ने मदद का हाथ बढ़ाया है और समझौते के तहत पाइपलाइन के जरिए 5000 टन डीजल बांग्लादेश भेजा जा रहा है। यह खेप Parbatipur सीमा के रास्ते बांग्लादेश पहुंचेगी।
भारत-बांग्लादेश ऊर्जा सहयोग के तहत यह आपूर्ति एक दीर्घकालिक समझौते का हिस्सा है। Bangladesh Petroleum Corporation (BPC) के चेयरमैन Muhammad Rezanur Rahman ने समाचार एजेंसी ANI को फोन पर इस आयात की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच हुए समझौते के अनुसार भारत हर साल पाइपलाइन के जरिए 1,80,000 टन डीजल बांग्लादेश को उपलब्ध कराएगा। इस व्यवस्था के तहत हर छह महीने में कम से कम 90,000 टन डीजल का आयात किया जाना तय है। BPC को उम्मीद है कि अगले दो महीनों के भीतर छह महीने के कोटे का पूरा आयात कर लिया जाएगा। फिलहाल जो 5000 टन डीजल भेजा जा रहा है, वह इसी समझौते की निर्धारित आपूर्ति का हिस्सा है और इससे अस्थायी राहत मिलने की उम्मीद है।
हालांकि आयात जारी रहने के बावजूद देश के भीतर ईंधन की जमाखोरी और कालाबाजारी की शिकायतें सामने आने लगी हैं। बांग्लादेश के ऊर्जा मंत्रालय ने आरोप लगाया है कि कुछ व्यापारी कृत्रिम कमी पैदा करने के लिए अवैध रूप से ईंधन का स्टॉक जमा कर रहे हैं। इसे रोकने के लिए सरकार ने कार्यकारी मजिस्ट्रेट की निगरानी में ‘मोबाइल कोर्ट’ अभियान शुरू किया है। राजधानी Dhaka में कई पेट्रोल पंपों पर छापेमारी भी की गई। जांच के दौरान सिटी फिलिंग स्टेशन, तेजगांव में ईंधन स्टॉक खत्म पाया गया, जबकि क्लीन फ्यूल, तेजगांव नामक स्टेशन सभी नियमों का पालन करता मिला। BPC के अनुसार देश में पेट्रोल और डीजल का मौजूदा स्टॉक लगभग दो सप्ताह का ही बचा है। सामान्य परिस्थितियों में रोजाना 12,000 टन डीजल की मांग रहती है, लेकिन फिलहाल केवल 9,000 टन प्रतिदिन ही आपूर्ति हो पा रही है।
सरकार का कहना है कि सख्त निगरानी और आयात बढ़ाकर जल्द ही ईंधन संकट को काबू में लाने की कोशिश की जा रही है।
मध्य-पूर्व में चल रहे Iran–Israel conflict और अमेरिका की सैन्य गतिविधियों के बीच भारत में कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर उठ रही चिंताओं पर सरकार ने स्थिति स्पष्ट कर दी है। सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक India के पास इस समय कच्चे तेल और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों का 25 करोड़ बैरल (करीब 4,000 करोड़ लीटर) से ज्यादा का सुरक्षित स्टॉक मौजूद है। यह भंडार इतना पर्याप्त है कि यदि किसी कारणवश वैश्विक सप्लाई पूरी तरह बाधित भी हो जाए, तो भी देश की ऊर्जा आपूर्ति प्रणाली लगभग 7 से 8 सप्ताह तक बिना किसी बड़ी समस्या के चल सकती है। अधिकारियों के अनुसार इस स्टॉक में कच्चे तेल के साथ-साथ पेट्रोल, डीजल और अन्य पेट्रोलियम उत्पाद भी शामिल हैं, जिससे आम लोगों को फिलहाल किसी तरह की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।