महाराष्ट्र में कृत्रिम पनीर के निर्माण व बिक्री पर एक साल का प्रतिबंध

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महाराष्ट्र में कृत्रिम पनीर के निर्माण व बिक्री पर एक साल का प्रतिबंध

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  • Publish Date - August 5, 2026 / 01:09 PM IST,
    Updated On - August 5, 2026 / 01:09 PM IST

मुंबई, पांच अगस्त (भाषा) महाराष्ट्र सरकार ने खाद्य सुरक्षा मानकों के व्यापक उल्लंघन और जनस्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के मद्देनजर कृत्रिम (एनालॉग) पनीर के निर्माण एवं बिक्री पर एक वर्ष के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। अधिकारियों ने बुधवार को यह जानकारी दी।

सरकारी आदेश के अनुसार, नियमों का उल्लंघन करने वालों को आजीवन कारावास और 10 लाख रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।

छत्तीसगढ़ के बाद महाराष्ट्र ऐसा प्रतिबंध लगाने वाला दूसरा राज्य बन गया है।

खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) ने बताया कि कई होटल, रेस्तरां, खान-पान सेवाएं और अन्य खाद्य प्रतिष्ठान पारंपरिक पनीर के स्थान पर ‘एनालॉग’ पनीर का उपयोग कर रहे थे, लेकिन इसकी जानकारी मेन्यू, बिल या डिस्प्ले बोर्ड पर नहीं दे रहे थे।

‘एनालॉग पनीर’ दूध के वसा के बजाय वनस्पति तेल, स्टार्च, इमल्सीफायर और अन्य योजकों से तैयार किया जाने वाला गैर-डेयरी विकल्प है। इसका उत्पादन पारंपरिक पनीर की तुलना में सस्ता होता है और इसमें आमतौर पर प्रोटीन की मात्रा भी कम होती है।

महाराष्ट्र के खाद्य सुरक्षा आयुक्त तुकाराम मुंधे द्वारा जारी राजपत्र अधिसूचना के अनुसार राज्य में एनालॉग पनीर के निर्माण, प्रसंस्करण, पैकिंग, भंडारण, वितरण, थोक एवं खुदरा बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।

एफडीए के एक अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत इस तरह का प्रतिबंध अधिकतम एक वर्ष के लिए ही लगाया जा सकता है।

अधिकारी ने कहा, ‘‘कानून में ऐसे उत्पादों पर केवल एक वर्ष तक प्रतिबंध लगाने का ही प्रावधान है। हमारी जानकारी के अनुसार ‘एनालॉग’ पनीर का पोषण मूल्य बहुत कम है। इस तरह के पनीर पर स्थायी प्रतिबंध लगाने के लिए हमारे पास कानूनी आधार नहीं है।’’

एफडीए ने आगाह किया कि उपभोक्ताओं को बिना बताए ‘एनालॉग’ पनीर को डेयरी पनीर के रूप में परोसना खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत अनुचित व्यापार व्यवहार माना जाएगा और इसके लिए दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

एफडीए के अनुसार, नुकसान की गंभीरता के आधार पर दोषियों को छह महीने के कारावास और एक लाख रुपये के जुर्माने से लेकर, यदि असुरक्षित भोजन के सेवन से किसी की मृत्यु हो जाती है तो आजीवन कारावास और न्यूनतम 10 लाख रुपये के जुर्माने तक की सजा हो सकती है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक विक्रम पचपुते ने सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए इसे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य की सुरक्षा की दिशा में अहम कदम बताया।

उन्होंने सरकार से ‘चीज़ एनालॉग’ की बिक्री की भी जांच करने का आग्रह किया और आरोप लगाया कि ऐसे उत्पादों को पारंपरिक ‘चीज़’ के रूप में बेचकर उपभोक्ताओं को गुमराह किया जा रहा है।

भाषा निहारिका अजय

अजय